इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को वकीलों के जोरदार विरोध प्रदर्शन से माहौल गरमा गया। एक अधिवक्ता के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार को लेकर नाराज वकीलों ने अदालत परिसर में नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कोर्ट नंबर 49 में तोड़फोड़ किए जाने की खबर भी सामने आई है। विवाद की शुरुआत मंगलवार को न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत में हुई एक घटना से बताई जा रही है। आरोप है कि सुनवाई के दौरान एक पुलिस अधीक्षक और अधिवक्ता के बीच बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद संबंधित वकील के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार किए जाने से अधिवक्ता समुदाय में नाराजगी फैल गई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
कोर्ट नंबर 49 में विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, मंगलवार, 27 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या 49 में एक मामले की सुनवाई होनी थी।इस दौरान एक जिले के पुलिस अधीक्षक अदालत में पेश होने पहुंचे थे। अदालत कक्ष में अधिकारियों के बैठने के लिए आगे की पंक्ति में कुर्सियां रखी गई थीं।बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक सरकारी अधिवक्ता के लिए निर्धारित कुर्सी पर बैठ गए।बार एसोसिएशन से जुड़े लोगों का आरोप है कि बाद में न्यायमूर्ति अजय भनोट के सामने इस घटनाक्रम की शिकायत की गई।अधिवक्ताओं का कहना है कि इसके बाद अदालत में जो घटनाक्रम हुआ, उससे वकीलों की गरिमा को ठेस पहुंची।हालांकि, संबंधित घटना का यह विवरण अधिवक्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है। पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वकील को जेल भेजने के कथित आदेश से बढ़ा विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस अधीक्षक द्वारा शिकायत किए जाने के बाद संबंधित अधिवक्ता को लेकर अदालत में तनाव बढ़ गया।अधिवक्ताओं का आरोप है कि न्यायमूर्ति अजय भनोट ने वकील को जेल भेजने का आदेश दिया।बताया जा रहा है कि अधिवक्ता ने अपनी ओर से माफी भी मांगी थी, लेकिन इसके बाद उन्हें पुलिस अधीक्षक से भी माफी मांगने को कहा गया।इस घटनाक्रम से अदालत में मौजूद अन्य वकील नाराज हो गए।वकीलों ने इसे अधिवक्ता समुदाय के सम्मान और पेशेवर गरिमा से जुड़ा मामला बताया।हालांकि, कथित जेल भेजने के आदेश की प्रमाणित प्रति और अदालत की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को अंतिम न्यायिक तथ्य नहीं माना जा सकता।विवाद के बाद अधिवक्ताओं ने इस मामले को बार एसोसिएशन के समक्ष उठाया।
वरिष्ठ अधिवक्ता के अपमान का भी लगाया आरोप
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी श्रीवास्तव के साथ कथित व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई गई है।बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं का आरोप है कि सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील का मजाक उड़ाया गया।इससे वहां मौजूद अन्य अधिवक्ता भी असहज हो गए।वकीलों का कहना है कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों के बीच पारस्परिक सम्मान बनाए रखना जरूरी है।उनके अनुसार, अदालत में किसी अधिवक्ता के साथ अपमानजनक व्यवहार पूरे अधिवक्ता समुदाय की गरिमा को प्रभावित करता है।इसी आधार पर बार एसोसिएशन ने मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।हालांकि, न्यायमूर्ति अजय भनोट की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नाराज वकीलों ने किया प्रदर्शन, कोर्ट रूम में तोड़फोड़
बुधवार को विवाद बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाराज वकीलों ने कोर्ट नंबर 49 में तोड़फोड़ की और अदालत परिसर के बाहर नारेबाजी की।प्रदर्शनकारी अधिवक्ता संबंधित घटना को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे थे।इस घटनाक्रम के बाद न्यायिक परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।वकीलों ने मांग की कि अधिवक्ता के साथ हुए कथित व्यवहार की जांच की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।हालांकि, तोड़फोड़ में कितनी संपत्ति क्षतिग्रस्त हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।इस घटना के संबंध में पुलिस कार्रवाई या किसी एफआईआर की पुष्टि भी उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हो सकी है।
बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने विवाद को लेकर औपचारिक कदम उठाया है।एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सीपी उपाध्याय और महासचिव संतोष कुमार मिश्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।27 अक्टूबर को लिखे गए इस पत्र में न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत में हुई कथित घटना का उल्लेख किया गया है।बार एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं की गरिमा और अदालत में सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है।इसके अलावा एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी है।हालांकि, बहिष्कार की घोषणा और उसके वास्तविक क्रियान्वयन में अंतर है। न्यायिक कार्य का बहिष्कार कितने समय तक होगा, इस संबंध में आगे की स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है।
बार और बेंच के बीच बढ़ा तनाव
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सामने आए इस विवाद ने बार और बेंच के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।न्यायिक व्यवस्था में अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। दोनों के बीच सहयोग और सम्मानजनक व्यवहार से न्यायिक कार्यवाही सुचारू रूप से चलती है।अधिवक्ताओं का कहना है कि अदालतों में उन्हें अपनी बात रखने के लिए सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए।दूसरी ओर न्यायालयों में अनुशासन बनाए रखना और सुनवाई को व्यवस्थित ढंग से संचालित करना भी आवश्यक है।इस विवाद के सभी पहलुओं को समझने के लिए संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।किसी भी तरह की तोड़फोड़ या न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न होने से अदालत आने वाले आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
अदालतों में हड़ताल को लेकर पहले भी सख्त रहा है न्यायिक रुख
अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य बहिष्कार का मुद्दा पहले भी अदालतों में उठ चुका है।जून 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वकीलों की आठ दिन की हड़ताल को अनुचित और अवैध बताया था।उस मामले में अदालत ने कहा था कि हड़ताल या न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने से आम वादकारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया था कि मुकदमों की सुनवाई में अनावश्यक देरी नागरिकों के न्याय पाने के
अधिकार
को प्रभावित करती है।सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों में भी वकीलों की हड़ताल और न्यायिक कार्य के बहिष्कार को लेकर स्पष्ट कानूनी सिद्धांत स्थापित किए गए हैं।ऐसे में मौजूदा विवाद में अधिवक्ताओं की शिकायतों के समाधान के साथ न्यायिक कार्य सुचारू बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
अब मुख्य न्यायाधीश के फैसले पर टिकी नजरें
इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुए इस घटनाक्रम के बाद सभी की नजरें मुख्य न्यायाधीश और हाईकोर्ट प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं।बार एसोसिएशन ने पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, अधिवक्ताओं की ओर से न्यायिक कार्य के बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई है।इस मामले में न्यायमूर्ति अजय भनोट का सार्वजनिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि कोर्ट रूम में कथित तोड़फोड़ को लेकर प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा।फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अधिवक्ता के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार से शुरू हुआ विवाद अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है।
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