प्रयागराज: टीजीटी-पीजीटी भर्ती को पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न पर कराने की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का प्रदर्शन गुरुवार को सड़क जाम तक पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों ने रामनामी गमछे को कफन की तरह ओढ़कर एकलव्य चौराहे पर चक्काजाम किया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया और कई अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया। प्रकाशित खबरों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। दैनिक जागरण ने एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है। अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय में पिछले चार दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। उनकी प्रमुख मांग भर्ती प्रक्रिया में पुरानी नियमावली बहाल करने की है। इसके साथ नए नियमों से प्रभावित होने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का एक अतिरिक्त अवसर देने की मांग भी उठाई जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांग पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए। 
आंदोलन की शुरुआत 26 अक्टूबर को हुई थी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। इसके बाद अगले दिनों में भी प्रदर्शन जारी रहा। पुरानी भर्ती व्यवस्था के आधार पर अवसर देने की मांग आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा बनी रही। गुरुवार को अभ्यर्थियों के सड़क पर बैठने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने एकलव्य चौराहे पर रामनामी गमछे को कफन की तरह ओढ़कर विरोध जताया। यह प्रदर्शन उनकी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रतीकात्मक तरीका था। सड़क जाम होने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। 
टीवी9 की रिपोर्ट में बताया गया है कि गुरुवार देर शाम सड़क जाम के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अभ्यर्थियों को समझाने का प्रयास किया। सहमति नहीं बनने पर पुलिस ने उन्हें हटाकर धरना समाप्त कराया। इसी दौरान प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि, हिरासत की कुल संख्या पर उपलब्ध रिपोर्टों में एकरूपता नहीं है और स्वतंत्र आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है।  प्रशासन की ओर से प्रदर्शन स्थल को लेकर भी आपत्ति जताई गई। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट ने शिक्षा निदेशालय परिसर के अंदर धरना देने की अनुमति नहीं होने की बात कही। अभ्यर्थियों को अन्य स्थान पर प्रदर्शन करने के लिए कहा गया था। इस तरह भर्ती संबंधी मांगों के साथ निदेशालय परिसर में धरने की अनुमति का मुद्दा भी टकराव की वजह बना। 
इसी मांग को लेकर अभ्यर्थी इससे पहले भी आंदोलन कर चुके हैं। टीवी9 के अनुसार, सितंबर में 5 से 23 तारीख तक प्रदर्शन चला था। बाद में आश्वासन मिलने पर धरना स्थगित हुआ, लेकिन समाधान नहीं निकलने का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थी फिर जुटे। इस बार भी वे भर्ती नियमों और अतिरिक्त अवसर के प्रश्न पर ठोस निर्णय चाहते थे। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद धरना हटाए जाने की जानकारी है। उपलब्ध खबरों में अभ्यर्थियों की मांग स्वीकार होने या भर्ती नियमों में बदलाव का कोई पुष्ट आदेश नहीं दिया गया है। इसी तरह हिरासत में लिए जाने को गिरफ्तारी नहीं माना जाना चाहिए। अभ्यर्थियों की रिहाई, आगे की कार्रवाई और मांगों पर निर्णय के बारे में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
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