Meerut मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में आवासीय क्षेत्रों में संचालित करीब 3,500 निजी स्कूलों पर संभावित सीलिंग कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में इन स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसको लेकर निजी स्कूल संचालकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ऑल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मेरठ मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि स्कूलों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई को 15 सितंबर 2026 तक स्थगित किया जाए, ताकि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत प्रशासन आवासीय क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों को बंद करने या सील करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। हालांकि, संगठन का तर्क है कि अचानक की जाने वाली कार्रवाई से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी और शिक्षा व्यवस्था में बड़ी बाधा उत्पन्न हो सकती है।
स्कूल संचालकों का कहना है कि यदि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के स्कूलों को बंद किया गया तो छात्रों के भविष्य पर इसका सीधा असर पड़ेगा। कई स्कूलों में हजारों बच्चे अध्ययनरत हैं, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी भी इन संस्थानों से जुड़े हुए हैं। अचानक स्कूल बंद होने से विद्यार्थियों को नए स्कूलों में प्रवेश, पढ़ाई की निरंतरता और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
एसोसिएशन ने प्रशासन से अपील की है कि कार्रवाई से पहले स्कूल संचालकों को पर्याप्त समय दिया जाए और एक निश्चित संक्रमणकाल निर्धारित किया जाए। संगठन का कहना है कि स्कूलों को नियमों के अनुरूप व्यवस्था सुधारने और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का अवसर मिलना चाहिए।
स्कूल लीडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे प्रशासन और न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं, लेकिन छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किए बिना नियमों का पालन कराने के लिए सभी पक्षों के बीच संवाद जरूरी है।
मामले को लेकर अभिभावकों में भी चिंता देखी जा रही है। कई अभिभावकों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में स्कूल बंद होते हैं तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। नए सत्र के बीच स्कूल बदलना बच्चों के लिए मानसिक और शैक्षणिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रशासन की ओर से अभी तक अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन को लेकर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि नियमों का पालन और बच्चों के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। स्कूल संचालक लगातार मांग कर रहे हैं कि किसी भी कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त समय और उचित समाधान का अवसर दिया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।