विधानसभा चुनाव से पहले आयोग का बड़ा प्लान, वोटर लिस्ट होगी अपडेट
पंचायत वोटर लिस्ट से खोजे जाएंगे छूटे मतदाता
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को अधिक सटीक और व्यापक बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। अब पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की मतदाता सूचियों का विधानसभा मतदाता सूची से मिलान कराया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उन पात्र नागरिकों की पहचान करना है, जिनके नाम पंचायत या निकाय की सूची में दर्ज हैं, लेकिन विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। आयोग ने इसके लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
दरअसल, प्रदेश में पंचायत चुनाव की मतदाता सूची और विधानसभा क्षेत्रों की ग्रामीण मतदाता संख्या के बीच करीब 2.4 करोड़ का अंतर सामने आया है। इस बड़े अंतर को देखते हुए निर्वाचन अधिकारियों ने सूचियों का मिलान कराने का फैसला किया है। हालांकि, इस अंतर का मतलब यह नहीं है कि सभी 2.4 करोड़ लोग पात्र होते हुए भी विधानसभा सूची से बाहर हैं। वास्तविक स्थिति का पता जांच और सत्यापन के बाद ही चल सकेगा।
12 नवंबर से शुरू होगी विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग की योजना के अनुसार, 12 नवंबर 2026 से मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम शुरू होगा। इसके तहत छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान करके उन्हें नाम दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इस अभियान में 1 जनवरी 2027 को पात्रता निर्धारित करने की आधार तिथि माना जाएगा। इसका मतलब है कि इस तारीख तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए पात्र नागरिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरना होगा। संबंधित निर्वाचन अधिकारी आवेदन और आवश्यक विवरण की जांच करने के बाद नाम दर्ज करने पर निर्णय लेंगे।
पंचायत और विधानसभा की सूचियों का होगा मिलान
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग तैयार करता है, जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों की मतदाता सूची भारत निर्वाचन आयोग के अधीन तैयार होती है। दोनों सूचियों के बीच अंतर सामने आने के बाद अब इनका व्यापक मिलान करने का निर्णय लिया गया है। इससे उन लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिनका नाम स्थानीय निकाय की सूची में है, लेकिन विधानसभा सूची में नहीं है। निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम दर्ज कराने के लिए जरूरी प्रयास किए जाएं। इसका उद्देश्य मतदान के अधिकार से किसी भी योग्य व्यक्ति को वंचित होने से बचाना है।
महिलाओं के नाम जोड़ने पर विशेष जोर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने विधानसभा मतदाता सूची में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि छूट गई पात्र महिलाओं की पहचान के लिए विभिन्न सरकारी विभागों का सहयोग लिया जाए। इस अभियान में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की मदद ली जाएगी।
युवाओं को भी मिलेगा नाम जुड़वाने का अवसर
निर्वाचन आयोग का विशेष ध्यान नए और युवा मतदाताओं पर भी रहेगा। ऐसे नागरिक जो पहली बार मतदान करने के पात्र बने हैं, उन्हें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए आवासीय कल्याण समितियों और स्थानीय सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने की योजना है।
प्रदेश में मतदान केंद्रों की संख्या भी बदली
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के साथ प्रदेश में मतदान केंद्रों का पुनर्गठन भी किया गया है। चुनाव आयोग की 4 नवंबर की मंजूरी के बाद मतदान केंद्रों की संख्या 1,77,516 से घटकर 1,73,730 रह गई है।यह प्रक्रिया प्रदेश के सभी 75 जिलों की 403 विधानसभा सीटों में की गई है। आयोग ने प्रति मतदान केंद्र 1,200 मतदाताओं के निर्धारित मानक के आधार पर पुनर्गठन किया है। बूथ लेवल अधिकारी मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र में हुए बदलाव की जानकारी देंगे। इसके साथ परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची के एक ही संबंधित भाग में रखने का प्रयास किया जाएगा।