वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव और भगवान शिव के प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले बाबा काल भैरव मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की। इसके बाद उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए और देश तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं लोक कल्याण की कामना की।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की काशी यात्रा में दोनों प्रमुख मंदिरों में दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान शामिल रहे। काशी में बाबा काल भैरव को नगर का रक्षक माना जाता है, जबकि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। इन दोनों मंदिरों का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है।
बाबा काल भैरव मंदिर में की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले बाबा काल भैरव के मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने परंपरागत विधि से दर्शन-पूजन किया और आरती उतारी।बाबा काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान काल भैरव काशी के रक्षक और संरक्षक हैं।यही कारण है कि वाराणसी आने वाले श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के साथ काल भैरव मंदिर में भी दर्शन करना महत्वपूर्ण मानते हैं।मुख्यमंत्री ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुसार अनुष्ठान संपन्न किए।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में टेका माथा
काल भैरव मंदिर में पूजा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे।यहां उन्होंने भगवान शिव के दर्शन किए और गर्भगृह में पूजा-अर्चना की। मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान विश्वनाथ की आराधना की गई।मुख्यमंत्री ने बाबा विश्वनाथ से देश और प्रदेश के नागरिकों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।श्री काशी विश्वनाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
काशी के कोतवाल का है विशेष धार्मिक महत्व
वाराणसी में स्थित बाबा काल भैरव मंदिर भगवान शिव के भैरव स्वरूप को समर्पित है।धार्मिक मान्यता है कि काल भैरव काशी की रक्षा करते हैं और नगर के आध्यात्मिक संरक्षक हैं। इसी कारण उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है।मंदिर का उल्लेख प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और काशी से जुड़ी परंपराओं में भी मिलता है।यहां श्रद्धालु भगवान काल भैरव की पूजा कर सुख, सुरक्षा और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।काशी के इस प्राचीन मंदिर में मंगलवार और रविवार को विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन का विशेष महत्व
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।वाराणसी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान विश्वनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु काशी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ की आराधना करते हैं।श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।मंदिर में मंगला आरती, भोग आरती और सप्तऋषि आरती जैसे धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।
मुख्यमंत्री का काशी से पुराना धार्मिक जुड़ाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने वाराणसी दौरों के दौरान कई बार बाबा काल भैरव और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर चुके हैं।इससे पहले 7 अक्टूबर 2026 को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ दोनों मंदिरों में पूजा-अर्चना की थी।उस यात्रा के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने पहले बाबा काल भैरव मंदिर में दर्शन किए और इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे।उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की थी।
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है वाराणसी
वाराणसी भारत के प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक नगरों में शामिल है। यहां भगवान शिव की उपासना से जुड़े अनेक ऐतिहासिक मंदिर स्थित हैं।बाबा काल भैरव और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।काशी की धार्मिक परंपराएं, मंदिरों की ऐतिहासिक पहचान और गंगा तट पर होने वाले अनुष्ठान इस नगर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंदिर यात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ी रही। उन्होंने दोनों मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना कर जनकल्याण की प्रार्थना की।