लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के हिंदी संस्करण 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' के विमोचन समारोह में उनके संघर्षपूर्ण जीवन और उपलब्धियों को याद किया। बुधवार, 14 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविंद को सम्मानित करते हुए कहा कि उनका जीवन साधारण परिस्थितियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरणादायक यात्रा का उदाहरण है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविंद के बचपन, पारिवारिक परिस्थितियों, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोविंद ने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन परिस्थितियों को कभी अपने लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।
परौंख गांव से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कानपुर देहात जिले के परौंख गांव का विशेष उल्लेख किया, जहां पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्म हुआ था। उन्होंने बताया कि उन्हें कई बार कोविंद की जन्मस्थली जाने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस गांव का दौरा कर चुके हैं।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनाथ कोविंद का जन्म बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अनेक अभावों का सामना करना पड़ा। उनके परिवार की परिस्थितियां कठिन थीं, लेकिन उन्होंने शिक्षा और मेहनत को अपने जीवन में आगे बढ़ने का माध्यम बनाया।मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में पले-बढ़े रामनाथ कोविंद का देश के राष्ट्रपति पद तक पहुंचना भारतीय लोकतंत्र में उपलब्ध अवसरों को दर्शाता है।
कम उम्र में उठ गया था मां का साया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन की एक दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि रामनाथ कोविंद ने बेहद कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था। इतनी छोटी उम्र में मां का साया सिर से उठ जाना किसी भी बच्चे के लिए अत्यंत कठिन परिस्थिति होती है।उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कोविंद ने जीवन की कठिनाइयों को अपने सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।योगी आदित्यनाथ के अनुसार, उन्होंने अभावों को कभी जीवन से भागने या दूसरों से कुछ मांगने का बहाना नहीं बनाया। इसके बजाय उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने और अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास जारी रखे।मुख्यमंत्री ने उनके इसी संकल्प और संघर्ष को विशेष रूप से रेखांकित किया।
गांव के स्कूल से हासिल की उच्च शिक्षा
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि रामनाथ कोविंद ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल में की थी। सामान्य पारिवारिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा का रास्ता नहीं छोड़ा।प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद कोविंद ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर कानून तथा सार्वजनिक जीवन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।रामनाथ कोविंद ने अपने सार्वजनिक जीवन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वह राज्यसभा के सदस्य रहे और बाद में बिहार के राज्यपाल बनाए गए। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। उनका कार्यकाल वर्ष 2022 तक रहा।
आत्मकथा में जीवन के संघर्ष और उपलब्धियों का वर्णन
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स' में उनके व्यक्तिगत जीवन, संघर्ष, अनुभवों और सार्वजनिक सेवा से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया गया है।इस पुस्तक के मूल अंग्रेजी संस्करण का विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किया था। पुस्तक में कोविंद के प्रारंभिक जीवन से लेकर राष्ट्रपति पद तक की यात्रा का विवरण शामिल है।हिंदी संस्करण के माध्यम से उनकी जीवन यात्रा हिंदी भाषी पाठकों तक पहुंच सकेगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा है कोविंद का जीवन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनाथ कोविंद का जीवन यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के माध्यम से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोविंद ने व्यक्तिगत कठिनाइयों को अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया और लगातार अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते रहे।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति की जीवन यात्रा को याद करते हुए उनके संघर्ष और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की कोविंद की कहानी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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