लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार, 26 अक्टूबर की देर शाम बड़ा हादसा हो गया। बख्शी का तालाब (बीकेटी) थाना क्षेत्र में किसान पथ पर फॉर्मेलिन केमिकल से भरा टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर पलटते ही उसमें भरा रसायन सड़क पर फैलने लगा और आसपास के इलाके में तीखी गंध के साथ धुंध जैसा वातावरण बन गया। रसायन के संपर्क में आने से आसपास के ग्रामीणों, राहगीरों और हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों को आंखों में जलन, खांसी, खुजली और सांस लेने में परेशानी होने लगी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित सड़क पर यातायात रोककर वाहनों को दूसरे रास्तों से निकाला गया।
हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। केमिकल की तेज गंध फैलने से आसपास रहने वाले लोग घबरा गए। कई लोगों को अचानक आंखों और गले में जलन महसूस होने लगी। स्थानीय लोगों की सूचना पर प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू कराया। प्रभावित क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर आम लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी गई।
टायर फटने से अनियंत्रित होकर पलटा टैंकर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फॉर्मेलिन से भरा टैंकर हरदोई जिले के संडीला से लखनऊ के गुडंबा स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री जा रहा था। सोमवार रात करीब आठ बजे किसान पथ पर मानपुर-बाना अंडरपास के पास अचानक वाहन का टायर फट गया। इससे चालक टैंकर पर नियंत्रण नहीं रख सका और वह सड़क पर पलट गया।
टैंकर के पलटते ही उसमें भरा तरल केमिकल सड़क पर बहने लगा। रसायन से निकलने वाली तेज गंध तेजी से आसपास फैल गई। हादसे के समय सड़क से गुजर रहे वाहन चालकों और आसपास के ग्रामीणों को भी इसकी वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन ने रसायन के प्रभाव को देखते हुए तत्काल यातायात बंद कराने और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने का फैसला किया।
कई गांवों और हॉस्टलों तक पहुंचा असर
केमिकल रिसाव का प्रभाव किसान पथ के आसपास बसे कई गांवों और शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टलों तक महसूस किया गया। मानपुर बाना, नगुवामऊ, गाजीपुर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने आंखों, नाक और गले में जलन की शिकायत की।
घटना के बाद प्रभावित लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। कुछ शुरुआती खबरों में 10 से अधिक गांवों और दर्जनों हॉस्टलों के 50 हजार से अधिक लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई, जबकि अन्य रिपोर्टों में करीब 10 से 12 हजार लोगों पर असर बताया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों की अंतिम संख्या की पुष्टि नहीं हुई है।
हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भी स्थिति चिंताजनक बन गई। रसायन की गंध आसपास फैलने के कारण विद्यार्थियों और कर्मचारियों को परेशानी हुई। ऐसे में प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही रोकने और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी।
दो किलोमीटर तक सुरक्षा घेरा, वाहनों का रूट डायवर्जन
हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रभावित इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र में एहतियाती प्रतिबंध लगाए गए। वहीं कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस ने घटनास्थल से लगभग 500 मीटर पहले ही वाहनों को रोक दिया था।
किसान पथ के प्रभावित हिस्से को यातायात के लिए बंद कर दिया गया। सड़क पर आने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा गया, ताकि कोई भी व्यक्ति रसायन के सीधे संपर्क में न आए।
बीकेटी थाना पुलिस के साथ अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम भी बचाव अभियान में शामिल हुई। सुरक्षाकर्मियों ने रसायन के रिसाव को नियंत्रित करने के साथ आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित बनाने की कार्रवाई की।
पांच घंटे की मशक्कत के बाद रिसाव पर काबू
रसायन के फैलाव को रोकने के लिए राहत-बचाव टीमों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अग्निशमन कर्मियों और एसडीआरएफ की टीम ने करीब पांच घंटे की कार्रवाई के बाद रिसाव और फैलाव को नियंत्रित किया।
रासायनिक पदार्थ के संभावित खतरे को देखते हुए बचावकर्मियों ने सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया। घटनास्थल पर चिकित्सा टीम और एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई, ताकि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
पुलिस के अनुसार, इस हादसे में किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है। हालांकि रसायन के संपर्क में आए लोगों की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बनाए रखी।
क्या है फॉर्मेलिन और क्यों खतरनाक है इसका रिसाव?
फॉर्मेलिन पानी में घुला फॉर्मेल्डिहाइड आधारित रासायनिक घोल होता है। इसका उपयोग चिकित्सा प्रयोगशालाओं में जैविक नमूनों के संरक्षण और प्लाईवुड, गोंद तथा अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
इस रसायन के संपर्क में आने पर आंखों, नाक, गले और त्वचा में जलन हो सकती है। इसकी वाष्प सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर खांसी और श्वसन संबंधी परेशानी पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रसायन के अधिक संपर्क में आने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे हादसों में बिना सुरक्षा उपकरणों के घटनास्थल के पास जाना खतरनाक हो सकता है।
प्रभावित लोगों को रसायन से दूर रहने, स्वच्छ हवा वाले सुरक्षित स्थान पर जाने और आंखों या त्वचा के संपर्क में आने पर साफ पानी से धोने की सलाह दी जाती है। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत-बचाव अभियान तेज करने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डीसीपी उत्तरी अमित कुमार आनंद के अनुसार, सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। विशेषज्ञों द्वारा रसायन के प्रभाव को निष्क्रिय करने की कार्रवाई की गई।
अपर जिलाधिकारी रामजी मिश्र ने भी बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन आवश्यक चिकित्सा तथा सुरक्षा उपाय कर रहा है। अधिकारियों ने लोगों से प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
हादसे ने खतरनाक रसायनों के परिवहन और सड़क सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाना और लोगों को रसायन के संपर्क से बचाना है।