बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। जनसुनवाई के दौरान पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई नहीं करना और सिर में गंभीर चोट होने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं करना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य ने सीबीगंज थाने के थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही तीनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू करा दी गई है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। एसएसपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पीड़ितों की शिकायतों को नजरअंदाज करना और जिम्मेदारी से बचना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गंभीर चोट के बावजूद नहीं दर्ज की गई FIR
जानकारी के अनुसार, मामला बरेली के सीबीगंज थाना क्षेत्र का है। यहां एक पीड़िता के साथ हुई घटना में उसके सिर पर गंभीर चोट आई थी। पीड़िता को उम्मीद थी कि पुलिस उसकी शिकायत सुनकर तत्काल कानूनी कार्रवाई करेगी और आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करेगी।
लेकिन आरोप है कि थाने पर शिकायत लेकर पहुंचने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सिर में गंभीर चोट होने के बावजूद पीड़िता की प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इससे परेशान होकर पीड़िता ने जनसुनवाई के दौरान अपनी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखी।पीड़िता की ओर से शिकायत किए जाने के बाद मामला एसएसपी अनुराग आर्य के संज्ञान में पहुंचा। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच कराने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई में शिकायत पहुंचने पर खुली लापरवाही
पुलिस व्यवस्था में जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं को सुनना और उनका उचित समाधान करना है। खासकर मारपीट, चोट और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में शिकायत मिलने पर पुलिस से तत्काल उचित कानूनी कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया कि गंभीर चोट लगने के बावजूद उसकी शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उसने उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की।एसएसपी अनुराग आर्य ने शिकायत को सामान्य मामला मानने के बजाय इसकी गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल कराई। जांच में सामने आई प्रारंभिक लापरवाही के आधार पर कार्रवाई की गई।
थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद एसएसपी अनुराग आर्य ने सीबीगंज थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करा दी गई है।
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में जवाबदेही तय करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। थाने में आने वाले फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और नियमानुसार कार्रवाई करना पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी है।विशेष रूप से महिलाओं और चोटिल पीड़ितों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता बेहद जरूरी होती है। ऐसे मामलों में शिकायत को नजरअंदाज करने से पीड़ित को न्याय मिलने में देरी हो सकती है।
SSP अनुराग आर्य ने दिखाई सख्ती
एसएसपी अनुराग आर्य ने जनसुनवाई और पुलिस के कामकाज को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उनका जोर इस बात पर है कि थाने में पहुंचने वाले प्रत्येक फरियादी की समस्या को गंभीरता से सुना जाए और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि शिकायत मिलने पर मामले की प्रकृति के अनुसार उचित कदम उठाएं। यदि किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की आवश्यकता है, तो कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाए।सीबीगंज के इस मामले में भी पीड़िता को जनसुनवाई के माध्यम से अपनी बात वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का मौका मिला। इसके बाद एसएसपी ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की।
विभागीय जांच में तय होगी जिम्मेदारी
तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के साथ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पीड़िता की शिकायत मिलने के बाद किस स्तर पर लापरवाही हुई और प्राथमिकी दर्ज करने में देरी या इनकार के पीछे क्या कारण थे।इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि शिकायत के समय थाने में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने निर्धारित दायित्वों का पालन किया था या नहीं।
विभागीय जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निलंबन को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाता, बल्कि यह जांच प्रक्रिया के दौरान की गई प्रशासनिक कार्रवाई है।
पुलिस की जनसुनवाई व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
बरेली में सामने आया यह मामला पुलिस की जनसुनवाई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। आम नागरिक जब किसी परेशानी में पुलिस थाने पहुंचता है, तो उसे सबसे पहले उम्मीद होती है कि उसकी बात सुनी जाएगी और उसे कानूनी मदद मिलेगी।
यदि गंभीर चोट के बावजूद शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है, तो पीड़ित का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो सकता है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शिकायतों की नियमित समीक्षा और लापरवाही करने वालों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।
इस कार्रवाई के बाद अब सीबीगंज थाने की कार्यप्रणाली और विभागीय जांच के नतीजों पर नजर रहेगी। फिलहाल एसएसपी अनुराग आर्य ने स्पष्ट कर दिया है कि जनसुनवाई में लापरवाही और पीड़ितों की शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।