उत्तर प्रदेश। गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार वाहनों के हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार, 4 नवंबर की रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में कार सवार पूर्व प्रोफेसर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे पर चल रही कार के सामने अचानक नीलगाय आ गई। नीलगाय से टक्कर होने के बाद चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और कार अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के दौरान चालक की जान बच गई, लेकिन कार की पिछली सीट पर बैठे पूर्व प्रोफेसर की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार वाहनों और अचानक सामने आने वाले वन्यजीवों से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार बुधवार रात गंगा एक्सप्रेसवे से गुजर रही थी। इसी दौरान अचानक सामने आई नीलगाय से उसकी टक्कर हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि कार संतुलन खोकर पलट गई। वाहन में सवार चालक दुर्घटना में बाल-बाल बच गया, जबकि पीछे बैठे पूर्व प्रोफेसर को जान गंवानी पड़ी। हालांकि, मृतक की पहचान और दुर्घटना के सटीक स्थान की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक्सप्रेसवे जैसे तेज रफ्तार मार्ग पर नीलगाय कैसे पहुंच गई। ऐसे मार्गों पर वाहनों की गति अधिक होने के कारण अचानक सामने आने वाले जानवरों से टक्कर का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से रात के समय वाहन चालकों को दूर से जानवर दिखाई नहीं देते और प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर वन्यजीवों की आवाजाही से जुड़े हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं। मई 2026 में हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र में नीलगाय से टकराकर एक कार पलट गई थी। उस दुर्घटना में एक महिला की मौत हुई थी और तीन अन्य लोग घायल हुए थे। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा फेंसिंग और निगरानी बढ़ाने की मांग भी उठ चुकी है।बुधवार रात हुई दुर्घटना में चालक के बच जाने और पिछली सीट पर बैठे पूर्व प्रोफेसर की मौत होने से वाहन में बैठे लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कार दुर्घटनाओं में एयरबैग, सीट बेल्ट और वाहन की संरचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इस विशेष हादसे में कौन-कौन से एयरबैग खुले और चालक के बचने में उनकी कितनी भूमिका रही, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीट बेल्ट केवल आगे बैठे यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि पिछली सीट पर बैठे लोगों के लिए भी जरूरी है। तेज टक्कर या वाहन पलटने की स्थिति में सीट बेल्ट शरीर को अपनी जगह सुरक्षित रखने में मदद करती है। पिछली सीट पर बैठे यात्री यदि सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं तो दुर्घटना के दौरान गंभीर चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रमुख सड़क परियोजनाओं में शामिल है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अनुसार, लगभग 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक बनाया गया है। यह मार्ग 12 जिलों से होकर गुजरता है और छह लेन का है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है।
इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच आवागमन को सुगम बनाना और यात्रा का समय कम करना है। लेकिन तेज रफ्तार के साथ सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करने और सड़क पर अचानक आने वाली बाधाओं के कारण गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।खासकर रात के समय वाहन चलाते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अंधेरा, सीमित दृश्यता और अचानक सामने आने वाले पशु दुर्घटना की आशंका बढ़ा सकते हैं। ऐसे में चालक को वाहन की रफ्तार परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित रखनी चाहिए।
एक्सप्रेसवे पर वन्यजीवों के प्रवेश को रोकने के लिए सुरक्षा फेंसिंग, नियमित निगरानी और संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी संकेत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि सड़क के आसपास वन्यजीवों की आवाजाही अधिक है, तो संबंधित क्षेत्रों की पहचान कर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।इससे पहले भी गंगा एक्सप्रेसवे पर नीलगाय के कारण वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। तीन नवंबर को प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, बदायूं के पास नीलगाय सामने आने से स्याना नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की गाड़ी अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई थी। हालांकि, उस हादसे में वाहन सवार सुरक्षित बच गए थे।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि एक्सप्रेसवे पर वन्यजीवों का अचानक प्रवेश सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। वाहन चालकों की सतर्कता के साथ-साथ सड़क प्रबंधन से जुड़े सुरक्षा इंतजाम भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।बुधवार रात हुई दुर्घटना में पूर्व प्रोफेसर की मौत एक दुखद घटना है। अब हादसे की विस्तृत परिस्थितियां, वाहन की गति और टक्कर के कारणों के बारे में अधिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।
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