ठाकुरद्वारा (मुरादाबाद)। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे में तेंदुआ तो नहीं फंसा, लेकिन चोर उसमें बंधी बकरी को ही चुराकर ले गए। हैरान करने वाली यह घटना गुरुवार सुबह सामने आई, जिसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों में खलबली मच गई। विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था और उसके अंदर बकरी बांधी थी। उम्मीद थी कि बकरी के लालच में तेंदुआ पिंजरे तक पहुंचेगा और उसे सुरक्षित पकड़ लिया जाएगा। लेकिन रात में अज्ञात चोर मौके पर पहुंचे और पिंजरे का ताला तोड़कर बकरी खोल ले गए। खास बात यह है कि एक दिन पहले मस्तलीपुर में भी तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे से दो मुर्गियां चोरी हो गई थीं। लगातार दो घटनाओं ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेंदुए के बजाय पिंजरे तक पहुंच गए चोर

मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था। पिंजरे के अंदर एक बकरी बांधी गई थी, ताकि उसकी मौजूदगी से आकर्षित होकर तेंदुआ पिंजरे तक पहुंच सके।

वन विभाग को उम्मीद थी कि तेंदुआ रात में पिंजरे के पास आएगा और उसे पकड़ने में सफलता मिलेगी। हालांकि, रात में तेंदुए के बजाय अज्ञात चोर वहां पहुंच गए।

चोरों ने पिंजरे का ताला तोड़ा और अंदर बंधी बकरी को खोलकर अपने साथ ले गए।

सुबह जब वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो बकरी गायब मिली। पिंजरे का ताला टूटा होने से चोरी की घटना सामने आई।

गुरुवार सुबह हुआ चोरी का खुलासा

गुरुवार सुबह वन विभाग के कर्मचारियों को घटना की जानकारी मिली।

पिंजरे में बंधी बकरी गायब होने और ताला टूटा मिलने के बाद कर्मचारियों में खलबली मच गई।

जिस पिंजरे को तेंदुआ पकड़ने के उद्देश्य से लगाया गया था, उसमें रखी गई बकरी के चोरी हो जाने से विभाग की योजना प्रभावित हुई।

पिंजरे से बकरी को निकालकर ले जाने के लिए ताला तोड़े जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, चोरों की संख्या कितनी थी और वे किस समय घटनास्थल पर पहुंचे थे, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है।

चोरी में शामिल लोगों की पहचान भी फिलहाल सामने नहीं आई है।

एक दिन पहले दो मुर्गियां भी हुई थीं चोरी

इस घटना से एक दिन पहले भी इसी तरह की चोरी का मामला सामने आया था।

बताया गया कि मस्तलीपुर में वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए एक अन्य पिंजरा लगाया था।

उस पिंजरे में दो मुर्गियां रखी गई थीं, ताकि तेंदुए को आकर्षित किया जा सके।

लेकिन वहां भी अज्ञात चोरों ने पिंजरे का ताला तोड़ दिया और दोनों मुर्गियां चुराकर ले गए।

अब अगले ही दिन बकरी चोरी होने की घटना सामने आने से विभाग के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है।

लगातार दो दिनों में पिंजरों के ताले टूटने और उनमें रखे जानवरों के गायब होने से सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जरूरत महसूस हो रही है।

वन विभाग की योजना पर फिरा पानी

तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाना वन विभाग की बचाव और निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

ऐसी कार्रवाई में पिंजरे का स्थान और उसकी सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।

पिंजरे में रखे गए जानवर का उद्देश्य तेंदुए को निर्धारित स्थान तक आकर्षित करना होता है, ताकि उसे नियंत्रित परिस्थितियों में पकड़ा जा सके।

लेकिन बकरी और मुर्गियों की चोरी से यह प्रयास प्रभावित हुआ है।

पिंजरे में रखे जानवरों के गायब होने के बाद तेंदुए को पकड़ने के लिए दोबारा व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

हालांकि, विभाग ने नए सिरे से बकरी या मुर्गियां रखने का निर्णय लिया है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

पिंजरे की निगरानी पर उठे सवाल

लगातार दो चोरी की घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल पिंजरों की निगरानी को लेकर है।

यदि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया था, तो वहां सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति क्या थी, यह महत्वपूर्ण विषय है।

पहले मस्तलीपुर में मुर्गियों की चोरी और उसके बाद बकरी की चोरी से स्पष्ट है कि अज्ञात लोग पिंजरों तक पहुंचने में सफल रहे।

हालांकि, घटनाओं के समय वन विभाग के कर्मचारी मौके पर तैनात थे या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

इसी तरह वहां सीसीटीवी कैमरे या अन्य निगरानी उपकरण लगाए गए थे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है।

इन जानकारियों के सामने आने के बाद ही निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।

तेंदुए की मौजूदगी से बनी हुई है चिंता

वन विभाग की ओर से तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जाने से स्पष्ट है कि क्षेत्र में वन्यजीव की गतिविधियों को लेकर विभाग कार्रवाई कर रहा है।

तेंदुए की आवाजाही वाले क्षेत्रों में लोगों और पालतू जानवरों की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।

विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिलने पर लोग सतर्क हो जाते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में वन विभाग के कर्मचारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

उन्हें तेंदुए की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के साथ ग्रामीणों को आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जागरूक करना होता है।

हालांकि, इस विशेष मामले में तेंदुए द्वारा किसी व्यक्ति या पालतू जानवर पर हमला किए जाने की जानकारी नहीं दी गई है।

चोरों ने कैसे तोड़ा पिंजरे का ताला?

दोनों घटनाओं में पिंजरे का ताला तोड़कर जानवरों की चोरी किए जाने की बात सामने आई है।

पहली घटना में दो मुर्गियां चोरी हुईं, जबकि दूसरी घटना में बकरी को खोलकर ले जाया गया।

ऐसे में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि चोरों ने पिंजरे तक पहुंचने और ताला तोड़ने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया।

इसके अलावा चोरी की दोनों घटनाओं में एक ही व्यक्ति या गिरोह शामिल था या अलग-अलग लोगों ने वारदात की, यह भी स्पष्ट नहीं है।

बिना जांच के दोनों घटनाओं को एक ही गिरोह से जोड़ना उचित नहीं होगा।

वन्यजीव पकड़ने के अभियान में आई बाधा

तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों से जानवरों की चोरी होने का सीधा असर विभाग के प्रयासों पर पड़ सकता है।

पिंजरा लगाने के लिए स्थान का चयन करना, आवश्यक सामान की व्यवस्था करना और उसकी निगरानी करना महत्वपूर्ण कार्य हैं।

यदि पिंजरे से बंधे जानवर को चोरी कर लिया जाए तो पूरी व्यवस्था दोबारा करनी पड़ सकती है।

इससे वन्यजीव को पकड़ने की प्रक्रिया में देरी होने की संभावना भी रहती है।

हालांकि, इस मामले में विभाग के अभियान में कितनी देरी हुई है, इसका विवरण सामने नहीं आया है।

ग्रामीणों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण

जिन क्षेत्रों में तेंदुए की गतिविधियां सामने आती हैं, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

विशेष रूप से रात के समय सुनसान स्थानों पर अकेले जाने से बचना चाहिए।

वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरों के पास अनावश्यक रूप से जाना भी जोखिम भरा हो सकता है।

यदि कोई व्यक्ति तेंदुए को देखता है, तो उसे स्वयं पकड़ने या भगाने का प्रयास करने के बजाय वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।

इस प्रकार की सावधानियों से लोगों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा में मदद मिलती है।

चोरी के मामले में कार्रवाई की जानकारी नहीं

बकरी और दो मुर्गियों की चोरी के मामले में अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि वन विभाग ने संबंधित पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है या नहीं।

दोनों घटनाओं में पिंजरों के ताले तोड़े जाने की बात कही गई है।

यदि शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो जांच में चोरी की परिस्थितियों और संभावित आरोपियों की पहचान महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को चोरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

लगातार दो घटनाओं से विभाग की बढ़ी परेशानी

पहले मस्तलीपुर में दो मुर्गियों की चोरी और उसके अगले दिन बकरी चोरी होने की घटना ने वन विभाग के सामने अलग तरह की चुनौती पैदा कर दी है।

विभाग का उद्देश्य तेंदुए को पकड़ना था, लेकिन अज्ञात चोर पिंजरों के ताले तोड़कर उनमें रखे जानवरों को ले गए।

इससे वन्यजीव पकड़ने की व्यवस्था के साथ पिंजरों की सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत सामने आई है।

दोनों घटनाओं में अब तक चोरों की पहचान नहीं हो सकी है।

फिलहाल तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है, जबकि उसे पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों से एक बकरी और दो मुर्गियां चोरी होने की जानकारी सामने आई है। अब वन विभाग के सामने तेंदुए को पकड़ने की चुनौती के साथ पिंजरों में रखे जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सवाल भी खड़ा हो गया है।

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