स्कूलों को बम की धमकियों से खुला राज, फर्जी ईमेल बेचने के आरोप में युवक गिरफ्तार
कानपुर/लखनऊ: स्कूलों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को भेजी गई बम धमकियों की जांच में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस ने फर्जी ईमेल आईडी बनाने और बेचने के कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। कानपुर से गिरफ्तार 24 वर्षीय अंकित शंखवार पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों में बैठे लोगों को फर्जी पहचान वाले ईमेल खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी के लैपटॉप में करीब पांच लाख ईमेल आईडी के रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें से कुछ खातों का इस्तेमाल धमकी भरे संदेश भेजने में किए जाने का आरोप है।
मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि पांच लाख खातों के रिकॉर्ड मिलना और सभी पांच लाख खाते बेचे जाने की पुष्टि होना अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इतनी संख्या में ईमेल आईडी से संबंधित डेटा मिलने का उल्लेख है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इनमें कितने खाते सक्रिय थे, किन लोगों को उपलब्ध कराए गए और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ। सभी खातों को धमकी वाले संदेशों से जुड़ा बताने की पुष्टि नहीं हुई है।
एटीएस की जांच नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम के स्कूलों को मिली धमकियों से आगे बढ़ी। संबंधित ईमेल खाते के तकनीकी विश्लेषण में कानपुर से उसे इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई। इसी डिजिटल सुराग के आधार पर जांचकर्ता आरोपी तक पहुंचे। अधिकारियों के मुताबिक, उसके पास से एक मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद हुआ। उपकरणों में मिली एक्सेल फाइलों में बड़ी संख्या में ईमेल खातों का विवरण मौजूद था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अंकित वर्ष 2021 से फर्जी डिजिटल पहचान के आधार पर ईमेल खाते तैयार कर रहा था। वह सोशल मीडिया के खरीद-बिक्री समूहों के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था। इसके बाद खातों का विवरण उन्हें उपलब्ध कराया जाता था। रिपोर्टों के अनुसार, ईमेल आईडी के साथ पासवर्ड, रिकवरी ईमेल और सुरक्षा संबंधी जानकारी भी साझा की जाती थी। इस तरह खरीदार को खाते का इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक विवरण मिल जाता था।
विदेशी संपर्कों की पड़ताल में पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा तुर्किये, मिस्र तथा अन्य देशों से जुड़े व्यक्तियों और समूहों का उल्लेख सामने आया है। आरोपी के उपकरणों में विदेशी नंबरों से संपर्क और वित्तीय लेन-देन संबंधी जानकारी मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, केवल विदेशी संपर्क मौजूद होने को किसी आतंकी संगठन से संबंध साबित होना नहीं माना जा सकता। संबंधित व्यक्तियों की पहचान और कथित अपराध में उनकी भूमिका जांच का विषय है। बांग्लादेशी नागरिक बताए गए अलामीन इस्लाम को भी ईमेल खाते उपलब्ध कराए गए थे। इसके बदले 6,000 यूएसडीटी का भुगतान मिलने का आरोप है। जांच एजेंसी ने मोबाइल में इस संपर्क और भुगतान से जुड़े साक्ष्य मिलने की बात कही है। अब यह पड़ताल महत्वपूर्ण होगी कि भुगतान किन खातों के लिए हुआ, उनका नियंत्रण किसके पास रहा और संबंधित ईमेल से भेजे गए संदेशों में कौन-कौन शामिल था।
धमकियों की जांच में 12 अक्टूबर को स्कूलों और अन्य स्थानों पर भेजे गए संदेशों से संबंधित खाते का उल्लेख आया है। इसके अतिरिक्त 23 अक्टूबर को मुंबई के महापौर कार्यालय को धमकी भेजने में इस्तेमाल हुई एक अन्य ईमेल आईडी भी आरोपी के उपकरणों में मिलने की जानकारी दी गई है। एटीएस का दावा है कि इन डिजिटल रिकॉर्ड से अलग-अलग घटनाओं के बीच संबंध तलाशने में मदद मिली। यह संबंध किस सीमा तक साबित होता है, आगे की जांच से स्पष्ट होगा।
रिपोर्टों में पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के दिल्ली-एनसीआर में प्रस्तावित कार्यक्रम और एक बॉलीवुड अभिनेता के आवास को मिली धमकियों का भी उल्लेख है। जांच एजेंसियां संबंधित खातों की आपूर्ति और उनके इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ रही हैं। ईमेल खाता बनाने, उसे बेचने और उससे धमकी भेजने की भूमिकाएं अलग हो सकती हैं। इसलिए प्रत्येक घटना में सीधे संदेश भेजने वाले व्यक्ति और खाते उपलब्ध कराने वाले की भूमिका अलग-अलग निर्धारित करना जरूरी होगा।
कथित नेटवर्क का दायरा कई राज्यों तक होने की जानकारी भी सामने आई है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट में एटीएस सूत्रों के हवाले से उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली और बंगाल से जुड़ी कड़ियों की जांच का उल्लेख है। आरोपी के दो संभावित सहयोगियों और उससे संपर्क रखने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इन सभी व्यक्तियों की गिरफ्तारी या अपराध में संलिप्तता की अंतिम पुष्टि नहीं दी गई है।
कानपुर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, आरोपी के फोन और लैपटॉप से विभिन्न देशों के संपर्क तथा यूएसडीटी लेन-देन संबंधी साक्ष्य मिले हैं। उपकरणों के डेटा से संदिग्ध संपर्कों की पहचान की जा रही है। जांच का केंद्र केवल खातों की संख्या नहीं, बल्कि उनका वास्तविक उपयोग और पैसे का प्रवाह भी है। इन्हीं पहलुओं से कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली और अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी, मोबाइल और लैपटॉप की बरामदगी तथा करीब पांच लाख ईमेल खातों के रिकॉर्ड मिलने की जानकारी सामने आई है। मामले में लखनऊ एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज किए जाने और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत मांगने की प्रक्रिया का भी उल्लेख है। पाकिस्तान-बांग्लादेश से संपर्क, धमकियों में खातों का उपयोग और कथित सहयोगियों की भूमिका जांच के दायरे में हैं। अंतिम दोष निर्धारण अदालत में होगा।