मेरठ: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी का विशेष फोकस पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर है। मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के 14 जिलों को भाजपा ने सांगठनिक रूप से 19 जिलों में बांट रखा है और इस पूरे क्षेत्र की 71 विधानसभा सीटों को लेकर व्यापक रणनीति पर काम किया जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे को इसी चुनावी तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
मेरठ में आयोजित शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। सम्मेलन में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे। पार्टी नेतृत्व ने बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर की तैयारियों की समीक्षा की तथा जमीनी स्तर से मिल रहे फीडबैक पर चर्चा की।
भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन की सक्रियता बढ़ाने के लिए शक्ति केंद्रों को अहम जिम्मेदारी दी है। पार्टी की व्यवस्था में करीब पांच बूथों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनाया जाता है। शक्ति केंद्र संयोजक इन बूथों पर पार्टी की गतिविधियों के संचालन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालते हैं। मेरठ के सम्मेलन में करीब 4,800 शक्ति केंद्र संयोजकों और मंडल अध्यक्षों के शामिल होने का कार्यक्रम था। बैठक में बूथ स्तर की तैयारी, संगठन की मजबूती, जनसंपर्क और 2027 के चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई।
सम्मेलन में पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं तथा उपलब्धियों की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने को कहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं से समाज के बीच सक्रिय रहने और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। वहीं नितिन नवीन ने प्रत्येक बूथ को मजबूत करने पर जोर दिया। पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सभी 71 विधानसभा सीटों पर अपने संगठन को सक्रिय करने का लक्ष्य सामने रखा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले दो विधानसभा चुनावों में यहां पार्टी के प्रदर्शन में बदलाव देखने को मिला है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इन 71 सीटों में भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 54 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में उसका आंकड़ा घटकर 41 रह गया था। इसी पृष्ठभूमि में पार्टी 2027 से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और स्थानीय राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर फीडबैक जुटाने में लगी है।
पश्चिमी क्षेत्र में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, बिजनौर, संभल, मुरादाबाद और रामपुर जैसे जिले शामिल हैं। इन जिलों में किसानों, गन्ना, रोजगार और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों के साथ जाट, गुर्जर सहित विभिन्न सामाजिक समूहों के समीकरण भी चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। पार्टी की संगठनात्मक कवायद में इन मुद्दों पर जमीनी प्रतिक्रिया जुटाए जाने की बात भी सामने आई है।
नितिन नवीन ने मेरठ में युवाओं के साथ भी संवाद किया। सुभारती विश्वविद्यालय में करीब दो हजार युवाओं के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महंगाई और बेरोजगारी जैसे विषयों पर चर्चा निर्धारित थी। इसके बाद शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन आयोजित किया गया। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य युवाओं से संवाद के साथ-साथ संगठन के अलग-अलग स्तरों के पदाधिकारियों से चुनावी तैयारियों का फीडबैक लेना भी रहा।
मेरठ में कार्यक्रमों के बाद नितिन नवीन का सहारनपुर दौरा भी निर्धारित किया गया। वहां पार्टी पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठकें रखी गईं। उनके पश्चिमी यूपी दौरे का मुख्य एजेंडा बूथ स्तर की तैयारियों की समीक्षा, संगठन को सक्रिय करना और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करना है।
भाजपा के लिए मिशन 2027 की रणनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 71 सीटें एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पार्टी नेतृत्व ने चुनाव से काफी पहले शक्ति केंद्र और बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाकर संगठनात्मक तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में पार्टी की बैठकों, जनसंपर्क अभियानों और बूथ स्तर की गतिविधियों के और तेज होने की संभावना है। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं।