Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित डोनेशन दुरुपयोग मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है, जिससे पूरे मामले की जांच और भी गंभीर हो गई है। सूत्रों के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने लगभग तीन महीने पहले मंदिर में हुंडी से मिलने वाले दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों पर चोरी के संदेह के चलते उन्हें ड्यूटी से हटाने की सिफारिश की थी।
जानकारी के मुताबिक, SBI ने यह कदम तब उठाया जब बैंक को दान की गिनती प्रक्रिया में कुछ अनियमितताओं और गड़बड़ियों की आशंका मिली। बैंक की ओर से की गई इस सिफारिश में संबंधित स्टाफ को तत्काल प्रभाव से हटाने की बात कही गई थी, ताकि दान प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ अधिकारियों ने इस सिफारिश के बीच हस्तक्षेप किया, जिसके चलते कथित तौर पर संबंधित स्टाफ को तत्काल हटाया नहीं गया। इस घटनाक्रम ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच, पुलिस ने डोनेशन फंड के कथित दुरुपयोग मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया है। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में विभिन्न स्तरों पर जानकारी एकत्र कर रही हैं और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी जल्द ही नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दान की राशि के प्रबंधन और निगरानी में किन-किन स्तरों पर लापरवाही या अनियमितता हुई।
इसी बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा पहले ही ट्रस्ट से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, यह भी चर्चा है कि गोपाल राव भी जल्द ही ट्रस्ट के कामकाज से अलग हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस जांच के दौरान अब तक आठ स्टाफ सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो कथित रूप से हुंडी में आए दान की गिनती प्रक्रिया से जुड़े थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क और संभावित वित्तीय अनियमितताओं की तह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, पुलिस और जांच टीम अब उन तरीकों की भी पड़ताल कर रही है, जिनके जरिए हुंडियों से कथित तौर पर पैसे निकाले गए। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में किन तकनीकी और प्रशासनिक खामियों का फायदा उठाया गया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि जांच टीम ने अब तक कुछ संपत्तियों और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े सुराग भी हासिल किए हैं। इन्हीं सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है और रिकवरी ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है, ताकि कथित रूप से चुराई गई राशि का पता लगाया जा सके।
इस पूरे मामले ने राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां भक्तों द्वारा दिए गए दान को आस्था का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के आरोपों ने लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।
फिलहाल, पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच, ट्रस्ट से जुड़े कई स्तरों पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।