कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस ने कारोबारी के बेटे सुब्रत मिनोचा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पूर्व नौकर विशाल गौतम से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुब्रत की कथित भूमिका सामने आई। गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बातचीत में सुब्रत ने अपने पिता पर निजी जीवन और महिलाओं से संबंधों को लेकर गंभीर आरोप लगाए और इन्हें हत्या की साजिश के पीछे की वजहों में से एक बताया। ये आरोप सुब्रत के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

विनीत मिनोचा की 5 सितंबर को कानपुर के केशवपुरम स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि उन पर चाकू से कई वार किए गए थे। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने विनीत की बहू शालू मिनोचा, पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया था। हालांकि जांच आगे बढ़ने और आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ करने के बाद मामले की कहानी बदलती गई।

पुलिस के अनुसार, रिमांड के दौरान विशाल गौतम ने अपना पहले का बयान बदल दिया। उसने दावा किया कि हत्या के लिए उसे शालू ने नहीं बल्कि सुब्रत ने कहा था और इसके बदले छह लाख रुपये देने की बात हुई थी। विशाल ने यह भी आरोप लगाया कि सुब्रत ने उसे निर्देश दिया था कि अगर वह पकड़ा जाए तो हत्या की साजिश में शालू का नाम ले। इस बयान के बाद पुलिस ने सुब्रत से पूछताछ तेज की और उसे गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया के सामने सुब्रत ने अपने पिता के चरित्र को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उसका दावा है कि पिता के कई महिलाओं से संबंध थे और वे उन पर बड़ी रकम खर्च करते थे, जबकि उसे खर्च के लिए सीमित पैसे दिए जाते थे। सुब्रत ने दावा किया कि पिता के कथित संबंधों की वजह से उसे सामाजिक रूप से शर्मिंदगी महसूस होती थी। पुलिस की जांच में आर्थिक विवाद और संपत्ति को लेकर आशंकाओं का पहलू भी सामने आया है।

जांच में सुब्रत पर लाखों रुपये का कर्ज होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, उस पर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज था और उसे आशंका थी कि भविष्य में पिता की संपत्ति उसे पूरी तरह नहीं मिलेगी। विभिन्न रिपोर्टों में कर्ज की राशि को लेकर कुछ अंतर भी सामने आया है। पुलिस आर्थिक लेनदेन, संपत्ति और पारिवारिक विवाद सहित अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, हत्या की योजना अचानक नहीं बनाई गई थी। जांच में दावा किया गया है कि इसकी तैयारी कई महीने पहले से चल रही थी। सुब्रत ने कथित तौर पर घर में लगे एक कैमरे को बंद किया था और विशाल को घर में प्रवेश करने के बाद दूसरा कैमरा बंद करने के लिए कहा था। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि योजना के अलग-अलग चरणों में कौन-कौन शामिल था और आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ।

पुलिस जांच में फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी और आरोपियों के कपड़ों से जुड़े साक्ष्य भी सामने आए हैं। पुलिस ने एक खुले प्लॉट से कथित तौर पर फ्लैट की चाबी बरामद की, जबकि आरोपी राजकिशोर के बताए स्थान से खून से सने कपड़े बरामद किए जाने का दावा किया गया है। जांच अधिकारी कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी आरोपियों के बयानों से मिलाकर देख रहे हैं।

इस हत्याकांड में सबसे बड़ा बदलाव बहू शालू की कथित भूमिका को लेकर आया है। शुरुआती जांच में शालू को हत्या की साजिश से जोड़कर गिरफ्तार किया गया था। बाद में विशाल के बदले बयान और सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कहा कि अब तक की जांच में शालू की हत्या की साजिश में भूमिका सामने नहीं आई है। हालांकि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच जारी है।

पुलिस के मुताबिक, विनीत मिनोचा कानपुर के प्रमुख दवा कारोबारियों में शामिल थे। उनकी हत्या के बाद से ही पुलिस पारिवारिक विवाद, संपत्ति, आर्थिक लेनदेन और कारोबारी संबंधों सहित कई पहलुओं पर जांच कर रही थी। शुरुआत में सामने आई कहानी और बाद में आरोपियों के बयानों में हुए बदलाव के कारण पुलिस ने घटनाक्रम को दोबारा जोड़ना शुरू किया।

मामले में सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद जांच अब हत्या की कथित साजिश, आर्थिक कारणों और पारिवारिक विवाद के इर्द-गिर्द केंद्रित है। सुब्रत द्वारा पिता के निजी जीवन को लेकर लगाए गए आरोप फिलहाल उसका पक्ष हैं। पुलिस के सामने मुख्य चुनौती आरोपियों के बदलते बयानों को डिजिटल, फोरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से सत्यापित करने की है। अंतिम रूप से आरोप साबित होने या किसी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी का फैसला न्यायिक प्रक्रिया में होगा।

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