लखनऊ। उत्तर प्रदेश को औद्योगिक विकास और निवेश के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC-5.0) के पांचवें संस्करण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस आयोजन के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में लगभग 7,000 परियोजनाओं के जरिए 7.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतारने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को उच्चस्तरीय बैठक में निवेश परियोजनाओं की प्रगति और आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजनाओं से जुड़ी भूमि, स्वीकृतियों, बुनियादी सुविधाओं और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में कोई बाधा न आए।
सभी 75 जिलों में निवेश पहुंचाने की तैयारी
प्रदेश सरकार का उद्देश्य औद्योगिक विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना है। इसके लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ पूर्वांचल, मध्यांचल और बुंदेलखंड में भी निवेश परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेश से संबंधित प्रक्रियाओं की नियमित निगरानी की जाए। विशेष रूप से उन परियोजनाओं पर ध्यान दिया जाए, जिनके लिए जमीन की उपलब्धता, विभागीय अनुमति या आधारभूत सुविधाओं का विकास जरूरी है।सरकार की योजना है कि निवेश प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक गतिविधियों में बदला जाए, जिससे प्रदेश में नए उद्योग स्थापित होने के साथ आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकें।
7,000 परियोजनाओं का तैयार हुआ खाका
बैठक में इन्वेस्ट यूपी की ओर से प्रस्तावित परियोजनाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार, लगभग 3,500 परियोजनाएं विभिन्न सरकारी विभागों के माध्यम से तैयार की गई हैं।
इसके अलावा जिलों के स्तर पर निवेश सारथी पोर्टल के माध्यम से 3,500 से अधिक परियोजनाएं जुड़ी हैं। वहीं, इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से 100 से अधिक बड़ी निवेश परियोजनाओं को भी इस आयोजन में शामिल करने की तैयारी है।
इन सभी परियोजनाओं को मिलाकर 7.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।सरकार का जोर इस बात पर है कि प्रस्तावित निवेश को उद्योगों की स्थापना और परियोजनाओं के वास्तविक संचालन में बदला जाए।
पश्चिमांचल में सबसे ज्यादा निवेश प्रस्तावित
क्षेत्रीय स्तर पर सबसे अधिक निवेश पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित है। यहां लगभग 4.75 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है।वहीं, पूर्वांचल में 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक, मध्यांचल में 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक और बुंदेलखंड में 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
इस क्षेत्रीय वितरण से स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार अलग-अलग हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने पर जोर दे रही है।विशेष रूप से बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश बढ़ने से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
90 बड़ी परियोजनाओं में करीब 4.75 लाख करोड़ का निवेश
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के पांचवें संस्करण में कई बड़ी परियोजनाएं भी शामिल होंगी।बैठक में जानकारी दी गई कि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली लगभग 90 परियोजनाएं तैयार हैं। इन परियोजनाओं में कुल मिलाकर करीब 4.75 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
ये परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन बड़ी परियोजनाओं के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।
डेटा सेंटर और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा निवेश
GBC-5.0 में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।डेटा सेंटर क्षेत्र में लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र में 1.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं शामिल हैं।रियल एस्टेट क्षेत्र में 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
इसके अलावा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात, सीमेंट, फार्मा, रसायन, वस्त्र, परिधान, ऑटोमोबाइल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की तैयारी है।विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपये और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं।पिछली चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की समीक्षा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के पहले चार संस्करणों की प्रगति की भी समीक्षा की।अधिकारियों ने बताया कि पिछले चार आयोजनों के माध्यम से 16 हजार से अधिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया था।
इनमें से आठ हजार से अधिक परियोजनाएं वाणिज्यिक संचालन शुरू कर चुकी हैं, जबकि आठ हजार से अधिक परियोजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।सरकार ने इन परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करते हुए लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कराने पर जोर दिया है।
निवेशकों को प्रोत्साहन राशि देने में देरी न हो
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेशकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन और आवश्यक प्रक्रियाओं का निस्तारण सुनिश्चित करें।
निवेशकों को समय पर स्वीकृति और सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।इसके साथ ही विभागों को निवेश परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।रोजगार और औद्योगिक विकास को मिल सकता है बढ़ावा
प्रदेश में बड़ी संख्या में निवेश परियोजनाओं के शुरू होने से रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।नए उद्योगों की स्थापना से निर्माण, परिवहन, तकनीक, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
हालांकि इन परियोजनाओं से कितने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे, इसका सटीक आंकड़ा परियोजनाओं के क्रियान्वयन और संबंधित विभागों के आकलन के बाद ही स्पष्ट होगा।सरकार का उद्देश्य निवेश के माध्यम से प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना और आर्थिक विकास को गति देना है।
मुख्यमंत्री ने एक्सप्रेसवे सुरक्षा की भी समीक्षा की
निवेश परियोजनाओं की समीक्षा के साथ मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न एक्सप्रेसवे पर हाल के दिनों में हुई सड़क दुर्घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की।उन्होंने अधिकारियों को इन दुर्घटनाओं के कारणों की तकनीकी और व्यावहारिक समीक्षा करने के निर्देश दिए।इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर निजी क्षेत्र के सहयोग से ट्रॉमा सेंटर विकसित करने और चौबीस घंटे निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
जीबीसी-5 से औद्योगिक विकास को नई गति देने की तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के पांचवें संस्करण को निवेश प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण अवसर मान रही है।7.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लगभग 7,000 प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से सभी 75 जिलों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है।
अब संबंधित विभागों के सामने परियोजनाओं के लिए जमीन, आवश्यक स्वीकृतियां और आधारभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने की चुनौती होगी।प्रस्तावित निवेश का वास्तविक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में शुरू होती हैं और कितनी वाणिज्यिक संचालन तक पहुंचती हैं।
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