सपा के प्रदर्शन के बाद विधानसभा का मानसून सत्र हुआ समाप्त

Update: 2026-08-05 09:30 GMT
उत्तर प्रदेश : विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार को निर्धारित समय से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। पहले यह सत्र 6 अगस्त तक चलना था, लेकिन लगातार दूसरे दिन समाजवादी पार्टी के विधायकों के हंगामे और सदन में बने गतिरोध के कारण विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कार्यवाही समाप्त करने की घोषणा कर दी। सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित की, जिससे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर अपना जनविरोधी रवैया दिखाया है। उनके अनुसार सरकार प्रदेश के किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के कल्याण के लिए 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट लेकर आई थी, लेकिन विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण इस पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार ने अनुपूरक बजट को सदन से पारित करा लिया है और इससे जुड़े विकास कार्य जल्द शुरू किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों, ग्राम चौकीदारों, महिला पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए थे। उनका आरोप था कि समाजवादी पार्टी नहीं चाहती थी कि इन योजनाओं पर चर्चा हो और प्रदेश के विकास से जुड़े फैसले आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह व्यवहार किसानों, महिलाओं और युवाओं के हितों के खिलाफ है।
इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही समाजवादी पार्टी के विधायक राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले और अपने विधायक के निलंबन को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सदन के भीतर और बाहर लगातार नारेबाजी की गई, जिससे कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी भावुक हो गए।
सतीश महाना ने सदन में कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने हमेशा विधानसभा की गरिमा बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच असहमति स्वाभाविक है, लेकिन सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि बार-बार मना करने के बावजूद कुछ सदस्यों ने सदन के अंदर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जो नियमों के विरुद्ध है।
भावुक होते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें गंभीरता से आत्ममंथन करना होगा कि क्या वे इस पद के योग्य हैं। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक पारी अब अंतिम चरण में है और वह जल्द इस विषय पर निर्णय लेंगे। उनके इस बयान ने सदन में मौजूद सभी सदस्यों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और राजनीतिक हलकों में भी इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
पूरा विवाद मंगलवार को शुरू हुआ था, जब समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। इसी दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने सदन के भीतर पोस्टर लहराया। विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें ऐसा करने से रोका, लेकिन निर्देश का पालन नहीं होने पर उन्हें पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके बाद मार्शलों को विधायक को सदन से बाहर ले जाने का निर्देश दिया गया, जिसके दौरान मार्शलों और विपक्षी विधायकों के बीच धक्कामुक्की भी हुई।
बुधवार को भी समाजवादी पार्टी के विधायक पहले से अधिक आक्रामक रुख के साथ विधानसभा पहुंचे। उन्होंने सदन के बाहर और भीतर पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया तथा लगातार नारेबाजी करते रहे। हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दो बार कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं होने पर अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि हंगामे के बावजूद अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया है और उसमें शामिल योजनाओं को जल्द लागू किया जाएगा। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए संघर्ष करता रहेगा। विधानसभा का यह मानसून सत्र राजनीतिक टकराव, तीखी बयानबाजी और अभूतपूर्व हंगामे के कारण चर्चा का केंद्र बन गया, जबकि विधानसभा अध्यक्ष की भावुक प्रतिक्रिया ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
Tags:    

Similar News