लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुटता का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने संगठन के भीतर मौजूद आपसी मतभेदों, नाराजगी और निराशा को पीछे छोड़कर विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटने की अपील की। शाह ने कहा कि पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनाव में वोटों की गिनती पूरी होने तक मिलकर काम करना होगा, ताकि भाजपा लगातार तीसरी बार प्रदेश की सत्ता में वापसी करने का अपना लक्ष्य हासिल कर सके।

पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “आप लोगों के मन में जो भी निराशा या नाराजगी है, उसे यहां से जाते समय गोमती नदी में डाल कर जाइए। हमें एकजुट रहना है। कई बार हम जो सोचते हैं, वह हासिल नहीं होता है।” उनके इस बयान को पार्टी संगठन के भीतर एकजुटता बनाए रखने की अपील के रूप में देखा जा रहा है। शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि व्यक्तिगत मतभेदों और असंतोष को चुनावी तैयारियों के बीच नहीं आने देना चाहिए।

अमित शाह ने अपने संबोधन में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संगठन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में कई बार व्यक्ति की अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में निराश होने के बजाय सामूहिक लक्ष्य के लिए काम करना जरूरी है। उनका संदेश था कि चुनावी तैयारियों के दौरान सभी को एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़ना होगा।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर और चुनौती दोनों है। पार्टी वर्ष 2017 से प्रदेश की सत्ता में है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दोबारा सरकार बनाई थी। अब पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ तैयारियों में जुटी है। इसी उद्देश्य से केंद्रीय नेतृत्व संगठनात्मक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दे रहा है।

अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से केवल चुनाव प्रचार के दौरान ही नहीं, बल्कि मतदान और मतगणना तक सक्रिय रहने की अपील की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनावी प्रक्रिया के अंतिम चरण तक संगठन में समन्वय बना रहना चाहिए। पार्टी के लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और चुनावी तैयारियों में स्थानीय संगठन का सक्रिय रहना आवश्यक माना जाता है।

शाह के संबोधन में गोमती नदी का उल्लेख विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने नाराजगी को गोमती नदी में डालकर जाने की बात कहकर नेताओं और कार्यकर्ताओं से पुराने मतभेद समाप्त करने का आग्रह किया। इस बयान का मुख्य संदेश संगठनात्मक एकता और सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ा था।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा के सामने समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की चुनौती भी है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 33 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन चुनावी परिणामों के बाद प्रदेश में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और संगठनात्मक तैयारियों को लेकर चर्चा बढ़ी है।

भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण होगा। प्रदेश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड और अन्य क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में स्थानीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा माना जाता है।

अमित शाह का यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी के कुछ क्षेत्रीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से संगठन तथा सरकार में पर्याप्त महत्व नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हाल में हुई संगठनात्मक बैठकों और फीडबैक प्रक्रिया के दौरान कुछ पदाधिकारियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। शाह ने इन परिस्थितियों के बीच कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत अपेक्षाओं से ऊपर उठकर संगठन के लिए काम करने का संदेश दिया।

लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पार्टी की विचारधारा और संगठनात्मक अनुशासन का महत्व बताया। उन्होंने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन पार्टी के मूल्य और सिद्धांत स्थायी रहने चाहिए।

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी नेताओं और कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत मतभेदों को पीछे छोड़कर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की। उन्होंने सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बूथ समितियों की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों तथा कार्यकर्ताओं के बीच नियमित संवाद की आवश्यकता बताई।

अमित शाह ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज की प्रशंसा भी की। उन्होंने कानून-व्यवस्था, निवेश और विकास से जुड़ी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। ये दावे उनके राजनीतिक संबोधन का हिस्सा थे। शाह ने कहा कि सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ संगठन के कार्यकर्ताओं की मेहनत भी चुनावी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की लगातार तीसरी सरकार बनाने का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनाव के दौरान वे संगठन और सरकार के कामकाज की जानकारी लेते रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी नेताओं को जनता के बीच सक्रिय रहने और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने का संदेश दिया।

शाह के इस दौरे से स्पष्ट है कि भाजपा नेतृत्व विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर सामने आई शिकायतों को संबोधित करने और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। अब पार्टी की आगामी बैठकों और कार्यक्रमों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने तथा बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं।

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