BJP कार्यकर्ताओं को अमित शाह ने दिया जीत का मंत्र, 2027 के लिए किया बड़ा ऐलान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुटता का बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेद, नाराजगी और निराशा भुलाकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत से जुटने की अपील की। शाह ने स्पष्ट किया कि पार्टी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाना है और इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को मतदान से लेकर मतगणना तक पूरी सक्रियता के साथ काम करना होगा।
अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “आप लोगों के मन में जो भी निराशा या नाराजगी है, उसे यहां से जाते समय गोमती नदी में डालकर जाइए। हमें एकजुट रहना है। कई बार हम जो सोचते हैं, वह हासिल नहीं होता है।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर संगठनात्मक मतभेद दूर करने और आगामी चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
शाह ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल बड़े नेताओं और सरकार की उपलब्धियों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। पार्टी का वास्तविक आधार उसके कार्यकर्ता हैं, जो बूथ स्तर पर जनता से सीधे जुड़े रहते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर संगठन के हित में काम करने का आह्वान किया।
केंद्रीय गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि पार्टी ने लंबे संघर्ष और संगठनात्मक मेहनत के बाद प्रदेश में अपनी मजबूत राजनीतिक स्थिति बनाई है। इस स्थिति को बनाए रखने के लिए लगातार जनता के बीच सक्रिय रहना जरूरी है।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर विशेष जोर
अमित शाह का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर कुछ स्थानों पर संगठनात्मक असंतोष और आपसी मतभेदों की चर्चाएं सामने आती रही हैं। पार्टी के कुछ पुराने कार्यकर्ताओं में संगठन में अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिलने और दूसरे दलों से आए नेताओं को महत्व दिए जाने को लेकर नाराजगी की खबरें भी सामने आई हैं।
ऐसे राजनीतिक माहौल में शाह ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि व्यक्तिगत शिकायतों को चुनावी तैयारियों के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। उनका संदेश था कि संगठन की मजबूती और चुनावी जीत के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
शाह ने कार्यकर्ताओं से लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने की अपील की। उन्होंने महाभारत के अर्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार अर्जुन की नजर केवल मछली की आंख पर थी, उसी तरह भाजपा कार्यकर्ताओं का ध्यान भी 2027 में सरकार बनाने के लक्ष्य पर होना चाहिए।
तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। इसके बाद 2022 के चुनाव में भी पार्टी ने सत्ता में वापसी की। अब भाजपा 2027 में लगातार तीसरी जीत दर्ज करके प्रदेश की राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में 2017 के ऐतिहासिक चुनाव परिणामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस चुनाव में भाजपा ने 312 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। शाह ने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि मजबूत संगठन और जनता के समर्थन से बड़े राजनीतिक लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत है और विपक्षी दल उसे सत्ता से नहीं हटा पाएंगे। शाह ने भाजपा की स्थिति की तुलना अंगद के पैर से करते हुए विश्वास जताया कि पार्टी आगामी चुनाव में फिर जीत दर्ज करेगी।
समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का मुद्दा उठाते हुए तत्कालीन सरकार को निशाने पर लिया।
शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता उस घटना को नहीं भूली है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए भाजपा की राजनीतिक और वैचारिक प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया।
इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए। भाजपा नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव में विकास, कानून व्यवस्था और अपनी वैचारिक प्रतिबद्धताओं को प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने रखने की तैयारी कर रहा है।
यूपी में समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐलान
अमित शाह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाती है, तो प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।
इस घोषणा को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में से एक माना जा रहा है। समान नागरिक संहिता को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है।
शाह के इस बयान से संकेत मिलता है कि भाजपा 2027 के चुनाव में संगठनात्मक एकजुटता के साथ अपने प्रमुख वैचारिक मुद्दों को भी जनता के सामने रखेगी।
2027 के चुनाव से पहले भाजपा का मिशन एकजुटता
उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा को पिछले चुनाव की तुलना में सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था। राज्य की 80 लोकसभा सीटों में भाजपा को 33 सीटें मिली थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 37 सीटें जीतने में सफल रही थी। इसके बाद से भाजपा संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दे रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अमित शाह का लखनऊ दौरा केवल चुनावी तैयारियों की समीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि संगठन के भीतर संभावित असंतोष को दूर करने का भी प्रयास था।
शाह ने साफ संदेश दिया कि चुनावी सफलता के लिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने और मतगणना पूरी होने तक चुनावी जिम्मेदारियों को निभाने की अपील की।
अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करते हुए जनता का विश्वास बनाए रखने की होगी। वहीं समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल भी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में अमित शाह का नाराजगी भुलाकर चुनावी मैदान में उतरने का संदेश उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।