हापुड़ : शहर के एलएन रोड स्थित भारत डेरी से लिए गए खाद्य पदार्थों के सभी 11 नमूने प्रयोगशाला जांच में फेल हो गए हैं। इनमें दही और क्रीम के तीन नमूने सेहत के लिए खतरनाक यानी ‘अनसेफ’ पाए गए हैं। आठ अन्य नमूने भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। मेरठ से आई प्रयोगशाला रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है। जांच में देव फ्रैस क्रीम सहित लिए गए नमूने शामिल थे। रिपोर्ट के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की पर्याप्तता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
भारत डेरी से जांच के लिए कुल 11 नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में इनमें से एक भी नमूना मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। तीन नमूनों का असुरक्षित श्रेणी में आना मामले का सबसे गंभीर पहलू है। बाकी आठ नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर सके। इस तरह रिपोर्ट में दो अलग स्थितियां सामने आई हैं—कुछ खाद्य पदार्थ असुरक्षित पाए गए हैं और अन्य मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
दही और क्रीम के तीन नमूनों को असुरक्षित बताया गया है। खाद्य पदार्थों की जांच में सामने आया यह निष्कर्ष उनकी सुरक्षा से जुड़ा है। हालांकि किस नमूने में कौन-सा पदार्थ मिला अथवा किस परीक्षण के आधार पर उसे असुरक्षित घोषित किया गया, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी विशेष रसायन या मिलावटी सामग्री का नाम नहीं लिया जा सकता। रिपोर्ट में तीन नमूनों के सेहत के लिए खतरनाक पाए जाने की जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आई है।
आठ अन्य नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इन्हें भी जांच में फेल बताया गया है, लेकिन इनकी स्थिति असुरक्षित पाए गए तीन नमूनों से अलग है। सभी 11 नमूनों को एक ही तरह से सेहत के लिए खतरनाक कहना रिपोर्ट के निष्कर्षों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन नमूने असुरक्षित हैं और आठ अन्य मानकों को पूरा नहीं करते। खबर में इस अंतर को स्पष्ट रखना जरूरी है।
जांच के लिए लिए गए खाद्य पदार्थों में देव फ्रैस क्रीम भी शामिल थी। भारत डेरी से संकलित सभी नमूनों की जांच के बाद मेरठ की प्रयोगशाला से रिपोर्ट आई है। उसी रिपोर्ट के आधार पर नमूनों के फेल होने का मामला सामने आया। फिलहाल बाकी उत्पादों के नाम और प्रत्येक नमूने का अलग-अलग परिणाम उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है। दही और क्रीम के तीन नमूनों के असुरक्षित पाए जाने का उल्लेख जरूर किया गया है।
रिपोर्ट ने डेरी से लिए गए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर स्थिति उजागर की है। मामला किसी एक नमूने के फेल होने तक सीमित नहीं है। जांच के लिए भेजे गए सभी 11 नमूने निर्धारित कसौटी पर विफल रहे हैं। इनमें तीन नमूनों का असुरक्षित होना खाद्य सुरक्षा से संबंधित चिंता को और बढ़ाता है। वहीं आठ अन्य नमूनों का मानकों के अनुरूप नहीं होना गुणवत्ता संबंधी कमी को दर्शाता है।
प्रयोगशाला के निष्कर्ष सामने आने के बावजूद आरोपित के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कार्रवाई को खानापूर्ति जैसा बताए जाने की बात सामने आई है। हालांकि किस प्रकार की कार्रवाई की गई, किस स्तर पर मामला लंबित है अथवा संबंधित अधिकारियों का क्या पक्ष है, इसका विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में किसी खास अधिकारी की भूमिका या किसी निश्चित कार्रवाई के बारे में अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकता।
इस मामले में जांच रिपोर्ट और उसके बाद की कार्रवाई, दोनों अहम हैं। रिपोर्ट में नमूनों की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। अब सवाल यह है कि इन निष्कर्षों के आधार पर आरोपित के खिलाफ हुई कार्रवाई कितनी पर्याप्त है। उपलब्ध विवरण में कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन जुर्माना, मुकदमा अथवा किसी अन्य कदम की जानकारी शामिल नहीं है। कार्रवाई का पूरा ब्यौरा सामने आने पर ही इस पहलू का स्पष्ट आकलन हो सकेगा।
दही और क्रीम जैसे खाद्य पदार्थों के नमूनों का असुरक्षित मिलना उपभोक्ताओं से सीधे जुड़ा विषय है। हालांकि इस मामले में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने अथवा उपचार कराने की सूचना नहीं दी गई है। जांच का निष्कर्ष खाद्य पदार्थों के नमूनों से संबंधित है। इसलिए इसे किसी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी घटना की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। अभी सामने आया तथ्य तीन नमूनों का असुरक्षित पाया जाना है।
एलएन रोड की भारत डेरी से लिए गए नमूनों के परिणाम ने खाद्य गुणवत्ता की जांच के महत्व को सामने रखा है। प्रयोगशाला रिपोर्ट में सभी नमूनों का फेल होना और उनमें से तीन का असुरक्षित श्रेणी में आना गंभीर निष्कर्ष हैं। आरोपित का पक्ष भी उपलब्ध विवरण में शामिल नहीं है। मामले में रिपोर्ट के तकनीकी विवरण और कार्रवाई की जानकारी सामने आने से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
फिलहाल मेरठ से आई रिपोर्ट के अनुसार, भारत डेरी से देव फ्रैस क्रीम सहित लिए गए सभी 11 नमूने जांच में विफल रहे हैं। दही और क्रीम के तीन नमूने सेहत के लिए खतरनाक पाए गए, जबकि आठ अन्य निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन निष्कर्षों के बावजूद कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।