जौनपुर। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर के एमबीबीएस बैच-2025 के छात्र आदर्श कुमार यादव ने महाविद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। आदर्श का चयन प्रतिष्ठित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की शॉर्ट टर्म स्टूडेंटशिप (एसटीएस) प्रोजेक्ट के लिए हुआ है। इस उपलब्धि पर महाविद्यालय में खुशी का माहौल है। कॉलेज प्रशासन ने छात्र को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

छात्र की इस सफलता को चिकित्सा शिक्षा के साथ शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डा.) आरबी कमल ने आदर्श कुमार यादव को सम्मानित किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

शोध के क्षेत्र में बढ़ेगी रुचि

प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डा.) आरबी कमल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है। बेहतर चिकित्सक तैयार करने के लिए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध की समझ विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार नए शोध हो रहे हैं और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए शोध एवं अनुसंधान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही शोध कार्यों के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, मेडिकल छात्रों को यदि पढ़ाई के साथ शोध के अवसर मिलते हैं तो उनमें सवाल पूछने, समस्याओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करने और नए समाधान तलाशने की क्षमता विकसित होती है।

प्रधानाचार्य ने कहा कि आईसीएमआर-एसटीएस जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध परियोजना में छात्र का चयन महाविद्यालय की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अन्य विद्यार्थियों को भी शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

आईसीएमआर-एसटीएस प्रतिष्ठित अवसर

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की शॉर्ट टर्म स्टूडेंटशिप मेडिकल छात्रों को शोध की बुनियादी प्रक्रिया से परिचित कराने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। इस तरह की परियोजनाओं के माध्यम से विद्यार्थी शोध की योजना बनाने, वैज्ञानिक पद्धति को समझने और किसी विषय पर व्यवस्थित तरीके से अध्ययन करने का अनुभव प्राप्त करते हैं।

मेडिकल शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों को इस तरह के शोध अवसर मिलने से उन्हें चिकित्सा विज्ञान के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। साथ ही वे यह जान पाते हैं कि किसी बीमारी, उपचार पद्धति या स्वास्थ्य संबंधी समस्या का अध्ययन वैज्ञानिक तरीके से किस प्रकार किया जाता है।

आदर्श कुमार यादव का इस कार्यक्रम के लिए चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ शोध के क्षेत्र में अपनी रुचि को आगे बढ़ाने का अवसर हासिल कर रहे हैं।

महाविद्यालय के लिए भी उपलब्धि

आदर्श की सफलता को कॉलेज प्रशासन ने संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों की उपलब्धि से जोड़कर देखा है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ शोध के वातावरण को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर की शोध परियोजना के लिए छात्र का चयन इस दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कॉलेज प्रशासन का मानना है कि एक छात्र की उपलब्धि दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रेरित करती है। इससे मेडिकल छात्रों के बीच शोध परियोजनाओं, वैज्ञानिक अध्ययन और अकादमिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ेगी।

शिक्षकों की ओर से भी आदर्श कुमार यादव को बधाई दी गई। शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि वह एसटीएस प्रोजेक्ट के दौरान पूरी मेहनत और लगन के साथ काम करेंगे तथा अपने शोध कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे।

वैज्ञानिक सोच विकसित करना जरूरी

प्रधानाचार्य ने कहा कि आज के समय में चिकित्सा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। नई बीमारियां, उपचार की नई तकनीकें और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में चिकित्सकों के लिए वैज्ञानिक सोच और शोध की समझ बेहद जरूरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों को केवल मौजूदा ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय नए ज्ञान के निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहिए। शोध के माध्यम से विद्यार्थी किसी समस्या को नए नजरिए से देख सकते हैं और उसके समाधान के लिए वैज्ञानिक आधार पर काम कर सकते हैं।

आईसीएमआर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की शोध परियोजना से जुड़ना छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की अकादमिक और वैज्ञानिक गतिविधियों का अनुभव भी प्रदान करता है।

अन्य छात्रों को मिलेगी प्रेरणा

आदर्श कुमार यादव की उपलब्धि से महाविद्यालय के अन्य छात्रों में भी उत्साह है। कॉलेज प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में अधिक संख्या में विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की शोध योजनाओं और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे।

मेडिकल कॉलेज में शोध संस्कृति को मजबूत करने के लिए छात्रों को मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और आवश्यक शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इससे संस्थान की अकादमिक पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।

आदर्श कुमार यादव का आईसीएमआर-एसटीएस प्रोजेक्ट के लिए चयन जौनपुर मेडिकल कॉलेज के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि न केवल छात्र की व्यक्तिगत मेहनत और प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि संस्थान में चिकित्सा शिक्षा के साथ शोध एवं वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Tags: