संभल। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उनके दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती दी कि यदि वास्तव में 13 करोड़ लोगों के वोट चोरी हुए हैं, तो वे कम से कम 13 ऐसे लोगों को सामने लाएं, जिनके वोट कथित तौर पर चोरी किए गए हों। कृष्णम ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनकी सोचने-समझने की क्षमता को लेकर भी व्यक्तिगत टिप्पणी की।
राहुल गांधी को दी 13 लोगों को सामने लाने की चुनौती
उत्तर प्रदेश के संभल में मीडिया से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राहुल गांधी लगातार बड़े पैमाने पर वोट चोरी होने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए।उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 13 करोड़ लोगों के वोट चोरी होने की बात कर रहे हैं, जबकि उनके अनुसार अभी तक 13 ऐसे मतदाता भी सामने नहीं आए हैं, जिनके वोट चोरी होने की पुष्टि हुई हो।कृष्णम ने राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए कहा कि वे ऐसे मतदाताओं को सामने लाएं, ताकि उनके आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सके।हालांकि, 13 करोड़ वोट चोरी होने का आंकड़ा विवादित राजनीतिक दावा है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी की बुद्धि को लेकर किया तीखा कटाक्ष
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके अनुसार वोट नहीं, बल्कि राहुल गांधी की बुद्धि चोरी हो गई है।उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लापता हो जाए, तो उसे खोजकर वापस लाया जा सकता है, लेकिन किसी की सोचने-समझने की क्षमता ही खो जाए, तो उसे कैसे वापस लाया जाएगा।कृष्णम की इस टिप्पणी को राहुल गांधी के चुनाव संबंधी आरोपों पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।उन्होंने कहा कि इतने बड़े आरोप लगाने वाले नेताओं को अपने बयानों के समर्थन में तथ्यों और प्रमाणों को जनता के सामने रखना चाहिए।
देश को बांटने की साजिश का भी लगाया आरोप
कृष्णम ने विपक्षी राजनीति की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि देश में विभाजन और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक दल को सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया से संबंधित गंभीर आरोपों को प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।हालांकि, देश को बांटने की कथित साजिश संबंधी आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किया बचाव
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए विपक्ष के उन आरोपों पर भी सवाल उठाए, जिनमें लोकतंत्र को खतरे में बताया जा रहा है।उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री और संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना कर रहा है।कृष्णम ने तर्क दिया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत विपक्ष को सरकार के खिलाफ बोलने और प्रदर्शन करने का अवसर मिल रहा है।उन्होंने चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग को लेकर भी विपक्ष के रुख की आलोचना की।
राहुल गांधी लगातार उठा रहे वोट चोरी का मुद्दा
दूसरी ओर, राहुल गांधी पिछले कई महीनों से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं।उन्होंने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।रविवार, 18 अक्टूबर को गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों के मुद्दे पर अपना संघर्ष जारी रखेगी। ये आरोप राजनीतिक रूप से विवादित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
SIR को लेकर विपक्ष का विरोध जारी
चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर भी विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्ष की ओर से प्रदर्शन और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
वोट चोरी के आरोपों पर राजनीतिक टकराव तेज
राहुल गांधी के आरोपों और आचार्य प्रमोद कृष्णम की प्रतिक्रिया के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।एक ओर कांग्रेस मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रही है, वहीं कृष्णम जैसे आलोचक राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में प्रमाण पेश करने को कह रहे हैं।चुनाव संबंधी किसी भी कथित अनियमितता की वास्तविकता का निर्धारण मतदाता रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
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