सर्राफ से ठगी के आरोपित गिरफ्तार, 14 लाख के सोने के जेवरात बदलने का आरोप; पुलिस पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश : आगरा में सर्राफ से ठगी के आरोप में तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद ट्रांस यमुना पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। ताजगंज के एक सर्राफ का आरोप है कि पुलिस ने ठगी के आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद करीब 14 लाख रुपये कीमत के सोने के जेवरात बरामद किए थे, लेकिन बाद में बरामद सोने को बदल दिया गया। सर्राफ का दावा है कि पुलिस ने बरामदगी में असली सोने के बजाय नकली माल दिखाया है।
मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। सर्राफ के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी सिटी ने मामले की जांच एसीपी छत्ता को सौंप दी है। अब जांच अधिकारी पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेंगे और यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि बरामदगी के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।
बताया जा रहा है कि ताजगंज क्षेत्र के सर्राफ के साथ ठगी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपितों की तलाश शुरू की थी। पुलिस की कार्रवाई के दौरान तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बरामदगी भी दिखाई। इसी बरामदगी को लेकर अब सर्राफ ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सर्राफ के अनुसार, पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब 14 लाख रुपये कीमत के सोने के जेवरात बरामद किए थे। उनका आरोप है कि बाद में बरामद असली सोने के जेवरात को बदल दिया गया और कागजों में नकली माल दिखाया गया।
सर्राफ का कहना है कि पुलिस इस मामले में मददगार बनकर उसके पास पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान उसे उम्मीद थी कि पुलिस ठगी के आरोपितों से उसका नुकसान हुआ सोना बरामद कराएगी। लेकिन अब बरामदगी में कथित तौर पर नकली माल दिखाए जाने के आरोप ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
सर्राफ के आरोपों के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल बरामद किए गए कथित सोने के जेवरात को लेकर है। यदि वास्तव में 14 लाख रुपये का सोना बरामद हुआ था, तो बरामदगी के दस्तावेजों में किस तरह का माल दर्ज किया गया और बाद में उसे लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई गई, इसकी जांच जरूरी हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सिटी ने एसीपी छत्ता को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। जांच में पुलिस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज, बरामदगी की प्रक्रिया, बरामद सामान और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि पुलिस ने बरामद माल को किस तरह सुरक्षित रखा और उसे किसके सुपुर्द किया गया।
जांच अधिकारी पुलिस टीम की कार्रवाई के दौरान मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जानकारी ले सकते हैं। वहीं, सर्राफ से भी उसके आरोपों से संबंधित जानकारी और उपलब्ध साक्ष्य लिए जा सकते हैं। बरामदगी के समय तैयार किए गए दस्तावेजों और माल के वास्तविक स्वरूप का मिलान भी जांच का हिस्सा हो सकता है।
तीनों आरोपितों को जेल भेजे जाने के बाद सर्राफ की ओर से लगाए गए आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। एक तरफ पुलिस ने ठगी के आरोपितों की गिरफ्तारी को अपनी कार्रवाई की सफलता के तौर पर पेश किया था, वहीं दूसरी तरफ शिकायतकर्ता की ओर से पुलिस पर ही बरामद माल बदलने का आरोप लगाए जाने से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जरूरत सामने आई है।
सर्राफ का आरोप है कि उसके करीब 14 लाख रुपये के सोने के जेवरात बरामद होने के बावजूद उसे असली माल नहीं मिला। वह पुलिस से बरामदगी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहा है। उसके आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पुलिस अधिकारियों की ओर से फिलहाल मामले की जांच एसीपी छत्ता को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान बरामदगी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई और सर्राफ द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए साक्ष्यों और दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा।
इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। उनके खिलाफ ठगी से जुड़े मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं, पुलिस पर लगाए गए आरोपों की जांच अलग स्तर पर की जा रही है।
फिलहाल सर्राफ के आरोपों के आधार पर पुलिस की भूमिका की जांच शुरू हो गई है। 14 लाख रुपये के कथित सोने की बरामदगी और उसे बदलने के आरोपों की सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी। एसीपी छत्ता की जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामदगी के दौरान किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।