भोले की भक्ति में शिवभक्तों का अनोखा संकल्प

Update: 2026-07-31 11:27 GMT

अमरोहा। सावन मास की शुरुआत होते ही देशभर में भगवान शिव की भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। जगह-जगह कांवड़ यात्राएं निकाली जा रही हैं और शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में बुलंदशहर के शिवभक्तों का एक जत्था अपनी अनोखी आस्था और कठिन तपस्या के कारण चर्चा में आ गया। 51 किलो गंगाजल से सजी विशाल कांवड़ लेकर जब यह जत्था मंडी धनौरा पहुंचा तो लोगों ने उनकी भक्ति और समर्पण को देखकर श्रद्धा से सिर झुका लिया।

सावन के पहले दिन मंडी धनौरा शहर की सड़कों पर शिवभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे बुलंदशहर के 10 सदस्यीय शिवभक्तों का जत्था बिजनौर स्टेट हाईवे के रास्ते नगर से होकर गुजरा। इस दौरान उनके कंधों पर रखी 51 किलो गंगाजल वाली भव्य कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। कांवड़ यात्रा के दौरान हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।

श्रद्धालुओं की इस यात्रा को देखकर राहगीर भी रुक गए और उन्होंने शिवभक्तों का स्वागत किया। कई लोगों ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया और भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाए। भारी वजन वाली कांवड़ लेकर कई किलोमीटर तक पैदल चलना आसान नहीं होता, लेकिन शिवभक्तों की आस्था ने इस कठिन यात्रा को भी सरल बना दिया।

जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। महादेव की कृपा और आशीर्वाद के कारण उन्हें इतनी भारी कांवड़ लेकर चलने में परेशानी महसूस नहीं होती। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि भक्ति, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।

51 किलो गंगाजल से भरी कांवड़ को संभालने के लिए जत्थे के सभी सदस्य मिलकर सहयोग कर रहे हैं। यात्रा के दौरान एक श्रद्धालु कुछ दूरी तक कांवड़ अपने कंधे पर उठाता है, इसके बाद दूसरा साथी उसे संभाल लेता है। इस तरह सभी शिवभक्त एक-दूसरे का साथ देते हुए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। यह सहयोग और सेवा भावना कांवड़ यात्रा की खास पहचान मानी जाती है।

इस जत्थे में सौरभ, राजीव, शंकर, ऋषभ समेत कई अन्य शिवभक्त शामिल हैं। सभी श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए यह कठिन यात्रा पूरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सावन के पवित्र महीने में भोलेनाथ को गंगाजल अर्पित करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का अनुशासन और भक्ति लोगों को प्रभावित कर रही है। भारी कांवड़ के बावजूद शिवभक्त लगातार आगे बढ़ते रहे और उनके चेहरे पर उत्साह और आस्था साफ दिखाई दी। स्थानीय लोगों ने भी उनकी भक्ति की सराहना की और यात्रा की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

सावन के पहले दिन बुलंदशहर के इन शिवभक्तों की 51 किलो गंगाजल वाली कांवड़ ने पूरे मंडी धनौरा क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना दिया। उनकी कठिन तपस्या और अटूट विश्वास ने लोगों को भक्ति और समर्पण का संदेश दिया। कांवड़ यात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आस्था के सामने बड़ी से बड़ी चुनौती भी छोटी पड़ जाती है।

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