पीलीभीत। देशभर में जहां यातायात व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कवायद तेज हो रही है और बड़े शहरों में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, एआई कैमरे और ऑटोमैटिक सिग्नल जैसी सुविधाएं लागू की जा रही हैं, वहीं पीलीभीत शहर में आज भी ट्रैफिक व्यवस्था पुराने तरीके से ही संचालित हो रही है। बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव के बावजूद शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक नियंत्रण की जिम्मेदारी अब भी पुलिसकर्मियों के हाथ और सीटी पर निर्भर है।
शहर की आबादी अब दो लाख से अधिक हो चुकी है, जबकि सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की संख्या 30 हजार के पार पहुंच गई है। इनमें करीब पांच हजार ई-रिक्शा भी शामिल हैं। वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण शहर के मुख्य मार्गों, बाजारों, स्कूलों और अस्पतालों के आसपास रोजाना जाम की स्थिति देखने को मिलती है। इसके बावजूद अभी तक प्रमुख चौराहों पर स्वचालित ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
पीलीभीत के गौहनिया चौराहा समेत कई प्रमुख स्थानों पर पुलिसकर्मी और यातायात गार्ड हाथ के इशारे और सीटी बजाकर वाहनों को नियंत्रित करते नजर आते हैं। सुबह और शाम के व्यस्त समय में जब एक साथ कई दिशाओं से वाहन आते हैं तो पुलिसकर्मियों के लिए यातायात को नियंत्रित करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कई बार थोड़ी सी लापरवाही के कारण लंबा जाम लग जाता है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यातायात विभाग के पास सीमित संख्या में कर्मचारी हैं। विभाग में करीब 60 कर्मी तैनात हैं, जिन्हें जिले के अन्य स्थानों पर भी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में शहर के बढ़ते ट्रैफिक दबाव को संभालना मुश्किल हो रहा है। पुलिसकर्मी लगातार मेहनत कर व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करते हैं, लेकिन वाहनों की संख्या के मुकाबले मौजूदा संसाधन पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं।
शहर में ट्रैफिक समस्या का एक बड़ा कारण व्यवस्थित टैक्सी और ई-रिक्शा स्टैंड का अभाव भी है। जगह-जगह वाहन चालक सड़क किनारे रुककर सवारी बैठाते और उतारते हैं, जिससे चौराहों और मुख्य मार्गों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। बाजार क्षेत्रों में अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण भी यातायात प्रभावित होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पीलीभीत जैसे तेजी से बढ़ते शहर में अब पुराने तरीकों से यातायात व्यवस्था संभालना मुश्किल होता जा रहा है। लोगों की मांग है कि शहर के प्रमुख चौराहों पर जल्द से जल्द स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएं। इसके अलावा एआई आधारित कैमरे, पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किए जाने की जरूरत है।
यातायात विभाग का कहना है कि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्मार्ट सिग्नल और अन्य आधुनिक सुविधाओं के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं। विभाग के अनुसार, कैमरों की व्यवस्था को भी बेहतर किया जा रहा है। शासन से आदेश मिलने के बाद स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को लागू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए पीलीभीत में अब तकनीक आधारित यातायात व्यवस्था जरूरी हो गई है। यदि समय रहते स्मार्ट सिग्नल, बेहतर पार्किंग और व्यवस्थित स्टैंड की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है। फिलहाल शहर की सड़कों पर यातायात नियंत्रण की जिम्मेदारी अभी भी पुलिसकर्मियों के हाथ और सीटी के भरोसे ही चल रही है।