त्रिपुरा: यूनिवर्सिटी ने अपनी सेंट्रल लाइब्रेरी में 'इंडियन नॉलेज सिस्टम्स' (IKS) कॉर्नर बनाया है। इसका मकसद भारत की पारंपरिक ज्ञान विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इस विषय पर होने वाली नेशनल लेवल की परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों की मदद करना है।
वाइस-चांसलर प्रोफेसर देबब्रत दास ने 12 अक्टूबर को इस सुविधा का उद्घाटन किया। यह पहल यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी ने 'विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, त्रिपुरा' के साथ मिलकर शुरू की थी।
इस सुविधा का मकसद छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स को भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर स्टडी मटीरियल उपलब्ध कराना और उन्हें आज की पढ़ाई-लिखाई और रिसर्च में इनकी अहमियत को समझने के लिए प्रोत्साहित करना है।
यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने कहा कि IKS कॉर्नर एकेडमिक कम्युनिटी के लिए भारत की बौद्धिक विरासत का अध्ययन करने और आधुनिक शिक्षा में इसके संभावित इस्तेमाल को समझने के लिए एक खास रिसोर्स सेंटर के तौर पर काम करेगा।
उद्घाटन कार्यक्रम में त्रिपुरा यूनिवर्सिटी के फाइनेंस ऑफिसर देबाशीष पाल और लाइब्रेरियन डॉ. चम्पेश्वर मिश्रा के साथ-साथ फैकल्टी सदस्य, यूनिवर्सिटी के कर्मचारी, छात्र, रिसर्च स्कॉलर्स और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
यह सुविधा 'भारत बौद्ध IKS 2.0 नेशनल लेवल एग्जामिनेशन ऑन इंडियन नॉलेज सिस्टम्स' के लिए तैयारी का मटीरियल भी उपलब्ध कराएगी, जो 21 नवंबर, 2026 को होने वाली है। यह परीक्षा देश भर के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ में आयोजित की जाएगी।
सेंट्रल लाइब्रेरी में स्टडी मटीरियल मिलने से उम्मीद है कि परीक्षा देने वाले छात्र इस विषय को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे।
'विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान' के साथ मिलकर, त्रिपुरा यूनिवर्सिटी का मकसद भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना और छात्रों व रिसर्चर्स के लिए इस विषय से जुड़ने के ज़्यादा मौके बनाना है।