शिलांग: शिलांग में हुए पहले 'हिल मैना मीडिया कॉन्क्लेव 2026' में नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के तीन पत्रकारों को पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें 'इंडिया टुडे NE' के पत्रकार तन्मय चक्रवर्ती भी शामिल थे। इस कॉन्क्लेव में न्यूज़ कवरेज में सटीकता, विश्वसनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में 'ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग' (मौके पर जाकर रिपोर्टिंग) की भूमिका पर चर्चा की गई।
'हिल मैना मैगज़ीन' द्वारा आयोजित यह कॉन्क्लेव 7 अक्टूबर को मेघालय के 'मोरो इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटीग्रल ट्रेनिंग एंड रिसर्च सोसाइटी' में "नॉर्थ-ईस्ट इंडिया में ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग" विषय पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पत्रकारों, मीडिया प्रोफेशनल्स, सरकारी अधिकारियों, छात्रों और उभरती आवाज़ों ने हिस्सा लिया और फील्ड से रिपोर्टिंग करने की व्यावहारिक चुनौतियों और बदलती ज़रूरतों पर चर्चा की।
कॉन्क्लेव में तीन वक्ता शामिल थे: 'द हिंदू' की सीनियर डिप्टी एडिटर सोमा बसु; न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया में एक दशक से ज़्यादा का अनुभव रखने वाले पत्रकार माइकलजीत युमनाम; और 'द मोरंग एक्सप्रेस' (दीमापुर) के प्रिंसिपल कॉरेस्पोंडेंट इमकोंगलेम्बा आओ। उन्होंने अपने पेशेवर अनुभव साझा किए और प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग (first-hand reporting), जानकारी की पुष्टि और स्थानीय संदर्भों को समझने के महत्व पर अपने विचार रखे।
बसु ने न्यूज़ स्टोरीज़ की विश्वसनीयता बनाने में फील्ड रिपोर्टिंग की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि घटनाओं और समुदायों को सही ढंग से पेश करने के लिए पत्रकारों को कई स्रोतों और दृष्टिकोणों से जुड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, "प्रामाणिकता के प्रति प्रतिबद्धता हर पत्रकार के लिए एक बुनियादी ज़रूरत है, और यह प्रामाणिकता ग्राउंड रिपोर्टिंग से आती है।" उन्होंने आगे कहा कि प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग से विश्वसनीयता बनती है और कहानियों में घटनाओं का ज़्यादा सटीक विवरण मिलता है।
युमनाम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि क्या हुआ है, यह समझने और जनता तक सच्चाई पहुँचाने के लिए पत्रकारों का घटना स्थल पर मौजूद रहना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग पत्रकारों को सुनी-सुनाई बातों से आगे बढ़ने और घटनाओं की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करती है।
आओ ने पूरी तरह से फ़ोन कॉल या तीसरे पक्ष से मिली जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय फील्ड में शारीरिक रूप से मौजूद रहने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करने, जानकारी की पुष्टि करने और स्थानीय संदर्भ से अवगत रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग से पत्रकारों को अपने पेशेवर कौशल और अनुभव को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है। ईस्ट खासी हिल्स ज़िले के डिप्टी कमिश्नर और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिलाष बरनवाल ने जनता तक सही और ज़रूरी जानकारी पहुँचाने में मीडिया की ज़िम्मेदारी के बारे में बात की।
उन्होंने कहा, "पत्रकारिता की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ हमें वह बताना नहीं है जो हम सुनना चाहते हैं, बल्कि हमें वह बताना है जो हमें जानना ज़रूरी है।"
इस कार्यक्रम में दर्शकों के साथ बातचीत का एक सेशन "द रूम स्पीक्स" और नॉर्थईस्ट राइटर्स अवॉर्ड 2026 भी शामिल था, जिसमें इस क्षेत्र के साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
मीडिया डायरेक्टर और 'हिल मैना मैगज़ीन' की एडिटर लक्ष्मी खरकोंगोर ने कहा कि लोगों और सार्थक बदलाव पर केंद्रित कहानियों के साथ पाठकों और योगदानकर्ताओं की लगातार भागीदारी से इस प्रकाशन का असर दिखता है।
यह कॉन्क्लेव 'हिल मैना मीडिया' की एक पहल है, जिसका मकसद पत्रकारिता, कहानी कहने की कला और क्षेत्रीय नज़रिए पर चर्चा के लिए एक मंच बनाना है, जिसमें नॉर्थईस्ट भारत में रिपोर्टिंग की असलियतों पर खास ध्यान दिया गया है।