असमिता डे के गोल्ड मेडल पर दीपा करमाकर ने जताया गर्व, बोलीं- पिता का सपना हुआ पूरा

Update: 2026-08-01 17:54 GMT
Agartala अगरतला। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो के 48 किलोग्राम वर्ग में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली असमिता डे की सफलता पर देशभर में खुशी का माहौल है। त्रिपुरा की ओलंपियन जिम्नास्ट दीपा करमाकर ने असमिता की इस शानदार उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। दीपा करमाकर ने कहा कि जूडो में भारत का पहला गोल्ड मेडल जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बीती रात असमिता डे के स्वर्ण पदक जीतने की खबर देखी तो वह बेहद खुश हुईं और गर्व महसूस किया। दीपा ने कहा कि इस खुशी और गर्व को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत प्रतिभाओं की धरती है और यहां के खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। असमिता डे ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल भारत को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की खेल प्रतिभा को दुनिया के सामने साबित किया है। दीपा करमाकर ने भावुक होते हुए कहा कि असमिता ने अपने पिता के सपने को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि भले ही असमिता के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जहां भी होंगे, वह अपनी बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर बेहद गर्व महसूस कर रहे होंगे।
ओलंपियन दीपा ने असमिता को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत के खिलाड़ी जूडो सहित अन्य खेलों में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करेंगे। असमिता डे की इस जीत के बाद खेल जगत में उत्साह का माहौल है। देशभर से खिलाड़ी, खेल प्रेमी और आम लोग सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई दे रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का यह स्वर्ण पदक जूडो के क्षेत्र में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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