त्रिपुरा: अधिकारियों ने 1 नवंबर को बताया कि केरल हाई कोर्ट के निर्देश पर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के एक पूर्व जवान के लापता होने के मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। यह जवान अप्रैल 2012 में ट्रेन से यात्रा करते समय लापता हो गया था।
लापता हुए व्यक्ति का नाम सुभाष चंद्र बोस था। उस समय उनकी उम्र 27 साल थी और वे एर्नाकुलम जिले के वेंगुअर के रहने वाले थे। वे त्रिपुरा स्टेट राइफल्स की तीसरी बटालियन में राइफलमैन के पद पर तैनात थे और लापता होने से पहले उन्होंने इस फोर्स में सात साल पूरे कर लिए थे।
बोस छुट्टी बिताने के बाद त्रिपुरा में अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे। 3 अप्रैल 2012 को रात 9:20 बजे उन्होंने एर्नाकुलम जंक्शन से एर्नाकुलम-गुवाहाटी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12507) पकड़ी। CBI की दोबारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, उनके पास रिजर्वेशन नहीं था और वे जनरल टिकट पर यात्रा कर रहे थे।
उनके पिता, पी.के. बालन, उन्हें रेलवे स्टेशन तक छोड़ने गए थे, लेकिन अलुवा स्टेशन पर उतर गए। बताया जाता है कि बोस ने अपने पिता से कहा था कि वे टिकट परीक्षक (TTE) की मदद से सीट का इंतजाम करने की कोशिश करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि 4 अप्रैल को बोस ने अपनी मां से फोन पर बात की और उन्हें बताया कि वे आंध्र प्रदेश पहुंच गए हैं। अगले दिन उन्होंने फिर फोन किया और बताया कि उनके मोबाइल का रिचार्ज बैलेंस खत्म होने वाला है। उन्होंने अपने परिवार को बताया कि अपनी ड्यूटी की जगह पहुंचने के बाद वे फिर संपर्क करेंगे, लेकिन इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका।
10 अप्रैल 2012 को परिवार को पता चला कि बोस धलाई जिले में अपनी यूनिट में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे हैं। इसके बाद उनके पिता ने 13 अप्रैल को एर्नाकुलम रेलवे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एक व्यक्ति के लापता होने का मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान, रेलवे पुलिस को पता चला कि बोस को आखिरी बार विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर जीवित देखा गया था। बाद में यह मामला विशाखापत्तनम की गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) को सौंप दिया गया, जिसने 15 अक्टूबर 2012 को इसे एक लापता व्यक्ति के मामले के रूप में दर्ज किया।
बालन द्वारा दायर एक याचिका के बाद, केरल उच्च न्यायालय ने पिछले महीने CBI को एर्नाकुलम रेलवे पुलिस और विशाखापत्तनम GRP, दोनों मामलों की जांच करने का निर्देश दिया।
अधिकारियों ने बताया कि CBI की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने 28 अक्टूबर को एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में FIR फिर से दर्ज की। अब इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जा रही है।
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