हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (KTR) के पासपोर्ट को लेकर सामने आई खबरों पर उनके वकील जक्कुला लक्ष्मण ने मंगलवार को सफाई दी। उन्होंने उन रिपोर्टों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया, जिनमें दावा किया गया था कि एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने फॉर्मूला-ई मामले में पासपोर्ट अथॉरिटी को KTR का पासपोर्ट जब्त करने का निर्देश दिया है। लक्ष्मण के मुताबिक, अदालत की ओर से ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ACB ने अदालत में KTR और अन्य आरोपियों के पासपोर्ट जब्त किए जाने की मांग को लेकर आवेदन दिया है, लेकिन KTR के वकील का कहना है कि इसे अदालत के आदेश के रूप में पेश करना गलत है।
KTR के वकील जक्कुला लक्ष्मण ने कहा कि मंगलवार को कुछ अखबारों में ऐसी खबर प्रकाशित हुई कि ACB कोर्ट ने पासपोर्ट अथॉरिटी को KTR का पासपोर्ट जब्त करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है और अदालत की कार्यवाही को गलत तरीके से पेश किए जाने जैसा है।लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि एंटी-करप्शन ब्यूरो की ओर से अदालत में एक आवेदन दाखिल किया गया है। इस आवेदन में KTR के पासपोर्ट को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि उनके अनुसार अदालत ने अभी पासपोर्ट अथॉरिटी को पासपोर्ट जब्त करने का कोई निर्देश नहीं दिया है। मीडिया में आवेदन और अदालत के आदेश के बीच अंतर को सही तरीके से नहीं दिखाया गया, जिसके कारण भ्रम की स्थिति बनी।
फॉर्मूला-ई मामले में ACB ने अदालत से KTR सहित अन्य आरोपियों के पासपोर्ट जब्त करने की मांग की है। अलग-अलग रिपोर्टों में भी यह बताया गया है कि जांच एजेंसी ने अदालत का रुख कर पासपोर्ट को लेकर आवेदन दिया है। वहीं KTR की कानूनी टीम ने जोर देकर कहा कि आवेदन दाखिल करना और अदालत द्वारा पासपोर्ट जब्त करने का आदेश जारी करना दो अलग-अलग बातें हैं।वकील लक्ष्मण ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार पासपोर्ट अथॉरिटी को KTR का पासपोर्ट जब्त करने के लिए अदालत की तरफ से कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों में किए गए दावे का खंडन करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को समझने के लिए अदालत में हुई कार्यवाही को सही संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यह मामला हैदराबाद में आयोजित फॉर्मूला-ई रेस से संबंधित कथित वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं की जांच से जुड़ा है। ACB ने इस मामले में KTR और अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच की है। KTR ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित बताई गई है।इससे पहले KTR 18 सितंबर को हैदराबाद की विशेष ACB अदालत में पेश हुए थे। अदालत ने मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी थी। उस समय भी KTR ने कहा था कि अदालत जब भी उन्हें बुलाएगी, वह उपस्थित होंगे और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करेंगे।अब पासपोर्ट से जुड़ी कार्रवाई को लेकर नई चर्चा शुरू हुई है। ACB की ओर से अदालत में आवेदन दाखिल किए जाने के बाद कुछ रिपोर्टों में इसे अदालत के निर्देश के तौर पर पेश किया गया। इसी पर KTR के वकील ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा पासपोर्ट अथॉरिटी को सीधे पासपोर्ट जब्त करने का कोई आदेश उनकी जानकारी में नहीं है।
वकील की सफाई के बाद इस मामले में आवेदन और न्यायिक आदेश के बीच अंतर अहम हो गया है। ACB की तरफ से पासपोर्ट को लेकर अदालत में मांग रखी गई है, लेकिन KTR की कानूनी टीम का दावा है कि उस मांग पर ऐसा कोई आदेश नहीं हुआ है, जैसा कुछ रिपोर्टों में बताया गया।फॉर्मूला-ई मामले को लेकर KTR पहले से ही कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। जांच एजेंसी की ओर से अदालत में अलग-अलग आवेदन और दस्तावेज पेश किए जा रहे हैं, जबकि KTR और उनकी कानूनी टीम आरोपों तथा जांच से जुड़े कई पहलुओं पर अपना पक्ष रख रही है। पासपोर्ट का ताजा मामला भी इसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।KTR के वकील ने साफ किया कि मीडिया में प्रकाशित किसी आवेदन को अंतिम न्यायिक आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ACB ने अदालत में पासपोर्ट को लेकर अनुरोध किया है और उस आवेदन पर अदालत की ओर से पासपोर्ट अथॉरिटी को जब्ती का निर्देश जारी किए जाने की बात सही नहीं है।फिलहाल KTR के पासपोर्ट को लेकर दोनों तथ्यों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है। जांच एजेंसी ने अदालत से पासपोर्ट जब्त करने की मांग की है, जबकि KTR के वकील का कहना है कि अदालत ने अभी तक पासपोर्ट अथॉरिटी को ऐसा करने का आदेश नहीं दिया है। मामले में आगे की स्थिति अदालत की आगामी कार्यवाही और आदेश के बाद और स्पष्ट होगी।
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