तेलंगाना में दर्दनाक घटना, खेत में बिजली का करंट लगने से किसान ने गंवाई जान
मेडक। तेलंगाना के मेडक जिले के मनोहरबाद मंडल में स्थित रंगियापल्ली गांव में मंगलवार, 27 अक्टूबर को एक किसान की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान राजबोइना लक्ष्मण के रूप में हुई है। खबरों के अनुसार, लक्ष्मण अपने खेत में सिंचाई के लिए बोरवेल की मोटर चालू करने गए थे, तभी वे बिजली की चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि बिजली की आपूर्ति, जो पहले कटी हुई थी, ठीक उसी समय बहाल हो गई जब लक्ष्मण मोटर स्टार्टर चालू करने की कोशिश कर रहे थे। इससे उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा, जो जानलेवा साबित हुआ। घटना के समय मौके पर तुरंत मदद के लिए कोई मौजूद नहीं था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किसान के भतीजे रामू ने उन्हें खेत में बोरवेल के पास पड़ा हुआ देखा और परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलने पर मनोहरबाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। किसान के शव को पोस्टमार्टम के लिए तुप्रान के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि मोटर चालू करने की कोशिश के दौरान बिजली के संपर्क में आने से यह हादसा हुआ। हालांकि, किसी तकनीकी खराबी या घटना से जुड़ी सटीक परिस्थितियों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा। लक्ष्मण की अचानक मौत से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। एक किसान के रूप में, वे खेती के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, जिसमें उनकी पत्नी और बच्चे शामिल हैं।
मृतक की उम्र और उनके बच्चों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में विरोधाभास है; कुछ स्रोतों के अनुसार उनकी उम्र 42 वर्ष थी, जबकि अन्य में 46 वर्ष बताई गई है।
इसी तरह, उनके परिवार के सदस्यों के बारे में दी गई जानकारी में भी अंतर है। इसलिए, इन विवरणों को तभी पक्का माना जा सकता है जब आधिकारिक तौर पर इनकी पुष्टि हो जाए। खेती पर निर्भर परिवारों के लिए, घर कमाने वाले सदस्य की अचानक मौत न केवल एक व्यक्तिगत नुकसान है, बल्कि इससे परिवार की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाएं भी खतरे में पड़ जाती हैं। ऐसी घटनाएं कृषि क्षेत्र में काम करने वालों की सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर सामने लाती हैं।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और घटना की जांच चल रही है। इस घटना के बाद, मनोहरबाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फिलहाल दुर्घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच का एक अहम पहलू मोटर स्टार्टर और उससे जुड़ी बिजली की वायरिंग की स्थिति का पता लगाना होगा। इसके अलावा, सुरक्षा के नजरिए से यह जानना भी जरूरी है कि क्या बिजली की आपूर्ति बहाल होने के समय कोई तकनीकी खराबी थी।
हालांकि, अब तक मिली रिपोर्टों के आधार पर, बिजली विभाग की ओर से किसी लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए, इस दुर्घटना के लिए किसी व्यक्ति या विभाग को जिम्मेदार ठहराना अभी जल्दबाजी होगी। यह घटना खेतों में लगे बिजली के उपकरणों—जैसे मोटर स्टार्टर, वायरिंग और अन्य कनेक्शन—की नियमित जांच की जरूरत को रेखांकित करती है। खेतों में बिजली से जुड़ी दुर्घटनाएं एक बढ़ती हुई चिंता का विषय बनती जा रही हैं। तेलंगाना के मेडक जिले में खेती-बाड़ी के दौरान करंट लगने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में, पेड्डा शिवानूर गांव में एक किसान की मौत हो गई थी, जो चारा काटते समय बिजली के तार के संपर्क में आ गया था।
इसी तरह, अगस्त 2026 में नागासनपल्ली गांव में एक किसान की मौत करंट लगने से हो गई, जब वह बोरवेल पंप की किसी तकनीकी खराबी को ठीक करने की कोशिश कर रहा था। ये घटनाएं बताती हैं कि कृषि क्षेत्र में बिजली सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। किसानों को अपने खेतों में बिजली की मोटर और स्टार्टर चलाते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। खराब उपकरणों, खुले तारों या क्षतिग्रस्त कनेक्शनों को खुद ठीक करने की कोशिश करने के बजाय, उन्हें किसी योग्य इलेक्ट्रीशियन से इनकी जांच करवानी चाहिए।
अगर खेत में बिजली का कोई टूटा हुआ तार दिखे, तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखना और तुरंत संबंधित बिजली विभाग को सूचित करना जरूरी है। मोटर चालू करते समय गीले हाथों से स्विच या स्टार्टर को छूने से भी बचना चाहिए। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि पंपों की सही अर्थिंग, उचित सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल और नियमित रखरखाव से इस तरह के जोखिमों को कम किया जा सकता है। इस बीच, रंगियापल्ली में लक्ष्मण नाम के एक किसान की मौत के मामले में पुलिस जांच कर रही है। यह घटना एक कड़ा सबक है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले बिजली के उपकरणों की सुरक्षा को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।