HYDERABAD हैदराबाद। तेलंगाना की जीवनरेखा कही जाने वाली मंजीरा नदी, जो गोदावरी की प्रमुख सहायक नदी है, इन दिनों उफान पर है। भारी बारिश के चलते निज़ामाबाद जिले में नदी ने तबाही मचा दी है। महाराष्ट्र के ऊपरी क्षेत्रों और तेलंगाना में हो रही लगातार बारिश से नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह स्थिति 1983 की विनाशकारी बाढ़ की याद दिलाती है। लगभग 42 साल बाद पहली बार इस क्षेत्र ने इतनी भीषण बाढ़ का सामना किया है। बाढ़ का सबसे ज़्यादा असर सलूर मंडल के गांवों पर पड़ा है। मंडरना, खजापुर और हूंसा गांव गुरुवार दोपहर से ही चारों तरफ से पानी से घिर गए थे। शुक्रवार सुबह तक हालात और बिगड़ गए, जब पानी घरों में घुस गया और लोग जान बचाने के लिए गांव छोड़ने को मजबूर हो गए।
इसी तरह हांगरगा, भीकनेल्ली, खंडगांव और कोप्परगा सहित कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रशासन के अनुसार, सात गांव पूरी तरह से जलमग्न और दुनिया से कट चुके हैं। इनमें से खंडगांव और कोप्परगा को छोड़कर बाकी गांवों की संपर्क व्यवस्था पूरी तरह टूट गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं, जबकि कई परिवार सरकारी राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन जलभराव और तेज धारा के कारण प्रशासन को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि 1983 की बाढ़ के बाद प्रशासन ने कई सुरक्षात्मक उपाय किए थे, लेकिन इस बार की स्थिति ने उन सभी व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया है। खेत, सड़कें और पुल बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। प्रभावित गांवों में बिजली और संचार सेवाएं भी बाधित हो चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मंजीरा नदी में इतनी तीव्र बाढ़ जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा पैटर्न का नतीजा हो सकती है। लगातार बारिश ने जलाशयों और बांधों पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा। इसका सीधा असर निचले क्षेत्रों पर पड़ा है। प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटे हालात और बिगड़ सकते हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने तेलंगाना और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में और भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। जिला प्रशासन ने एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस को राहत कार्यों में लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक की बाढ़ में उनकी फसलें और पशुधन बह गए हैं। कई परिवारों का साल भर का जीवन-यापन संकट में पड़ गया है। सरकार से मांग की जा रही है कि उन्हें त्वरित राहत और पुनर्वास सहायता प्रदान की जाए।
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