हैदराबाद: तेलंगाना सरकार ने राज्य भर में 37 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्थापित करने की अनुमानित लागत को 296 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 425.5 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे प्रति स्टेशन लागत 8 करोड़ रुपये से बढ़कर 11.5 करोड़ रुपये हो गई है।

ये स्टेशन वाहनों के मैनुअल फिटनेस निरीक्षण की जगह लेंगे। इनमें विशेष सेंसर का इस्तेमाल किया जाएगा, जो वाहनों को सड़क पर चलने के योग्य (रोडवर्दी) प्रमाणित करने से पहले उनकी ब्रेकिंग क्षमता, इंजन परफॉरमेंस, उत्सर्जन (एमिशन) और अन्य मानकों की जांच करेंगे। इन केंद्रों पर भारी और मध्यम वाहनों (जैसे ट्रक और बस) के साथ-साथ कारों जैसे हल्के मोटर वाहनों की भी जांच की जाएगी।

परिवहन आयुक्त के. इलाम्बरीथी ने TNIE को बताया कि सरकार को दो साल के भीतर अपना निवेश वापस मिलने की उम्मीद है। इन स्टेशनों से यूजर फीस के जरिए सालाना लगभग 250 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान है। पहले चरण में 15 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिसके छह से आठ महीने में पूरा होने की उम्मीद है।

इलाम्बरीथी ने बताया कि प्रति स्टेशन 8 करोड़ रुपये का शुरुआती अनुमान केवल एक प्रारंभिक आकलन था, जबकि 11.5 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान अधिकारियों द्वारा लगभग छह महीने पहले तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने प्रति स्टेशन लागत लगभग 14.5 करोड़ रुपये आंकी है, जबकि ओडिशा में यह अनुमान 17 करोड़ रुपये है।

गुरुवार को परिवहन, सड़क और भवन विभाग द्वारा जारी एक सरकारी आदेश के अनुसार, इस परियोजना को परिवहन विभाग के तहत एक 'स्पेशल पर्पस व्हीकल' (SPV) के माध्यम से 'सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल' (स्व-वित्तपोषित मॉडल) पर लागू किया जाएगा। यह SPV स्टेशनों की स्थापना और रखरखाव के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों (जिसमें HUDCO भी शामिल है) से कर्ज लेगा।

कुल 37 स्टेशनों में से 15 स्टेशन पहले चरण में स्थापित किए जाएंगे। इनमें पुराने जिला मुख्यालयों में से प्रत्येक पर एक-एक स्टेशन और ग्रेटर हैदराबाद में चार अतिरिक्त स्टेशन शामिल होंगे। पहले चरण की अनुमानित लागत 172.5 करोड़ रुपये है, जबकि बाकी 22 स्टेशन दूसरे चरण में 253 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किए जाएंगे।

 

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