हैदराबाद: RIMS में तीन नवजात शिशुओं की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों का निरीक्षण करने के लिए एक साल पहले ही एक समिति बनाई गई थी।

डॉक्टरों और अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी वाली इस समिति को राज्य द्वारा संचालित संस्थानों का निरीक्षण करने का काम सौंपा गया था और स्वास्थ्य सचिव को भी एक कॉलेज की जिम्मेदारी दी गई थी। टीमों से कहा गया था कि वे फायर सेफ्टी, मैकेनिकल समस्याओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरणों (उनकी एक्सपायरी डेट सहित) की जांच करें। उनसे यह भी कहा गया था कि वे समस्याओं को समझने के लिए कॉलेजों में छात्रों से बातचीत करें।

सूत्रों ने डेक्कन क्रॉनिकल को बताया कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कुछ छोटी-मोटी समस्याओं की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा को दी गई थी। उदाहरण के लिए, गांधी अस्पताल की एक रिपोर्ट में कई जगहों पर लीकेज की बात भी कही गई थी।

मंगलवार की दुखद घटना के बाद तेलंगाना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (T-JUDA) और तेलंगाना गवर्नमेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (TGGDA) ने इलेक्ट्रिकल और फायर-सेफ्टी सिस्टम की तुरंत समीक्षा करने की मांग की है।

T-JUDA ने सुरक्षित और पर्याप्त इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, नियमित सेफ्टी ऑडिट, चालू SNCU/NICU और नवजात शिशुओं के लिए क्रिटिकल-केयर सुविधाओं, पर्याप्त फायर-सेफ्टी सिस्टम और इमरजेंसी एग्जिट, बैकअप पावर, पर्याप्त बेड क्षमता और पर्याप्त डॉक्टर, नर्स व अन्य हेल्थकेयर कर्मचारियों की मांग की। एसोसिएशन ने इलेक्ट्रिकल, फायर-सेफ्टी और मेडिकल उपकरणों के नियमित निरीक्षण और रखरखाव के साथ-साथ क्रिटिकल-केयर क्षेत्रों में आपदा की तैयारी और इमरजेंसी-रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल की भी मांग की।

एसोसिएशन ने कहा कि सरकारी अस्पतालों को आरोग्यश्री फंड जारी करने में देरी से मेडिकल और बायोमेडिकल उपकरणों, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, फायर-सेफ्टी उपायों के रखरखाव और इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीद पर असर पड़ रहा है। इसने सरकार से आग्रह किया कि वह तुरंत बकाया आरोग्यश्री फंड जारी करे और SNCU, NICU, ICU और ऑपरेशन थिएटर में उपकरणों के रखरखाव के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध कराए।

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