हैदराबाद: केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी 25 से 30 अक्टूबर तक ऑस्ट्रेलिया के छह दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे सिडनी और मेलबर्न जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों, खनन तकनीक, प्रोसेसिंग और रिसर्च के क्षेत्र में कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) और अन्य संसाधन-संपन्न देशों के साथ भारत के सहयोग को और मजबूत करना है।

एक बयान के अनुसार, इस यात्रा का मकसद भारत के इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए जरूरी खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है। किशन रेड्डी भारतीय खनन परियोजनाओं में निवेश के अवसरों, संयुक्त खोज (एक्सप्लोरेशन), तकनीक के हस्तांतरण, कौशल विकास और वैल्यू-एडेड प्रोसेसिंग की संभावनाओं पर भी चर्चा करेंगे।

सिडनी में, किशन रेड्डी 'इंटरनेशनल माइनिंग एंड रिसोर्सेज कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो (IMARC)-2026' में हिस्सा लेंगे, जहां वे वैश्विक अवसरों पर मुख्य भाषण (कीनोट एड्रेस) देंगे। वे NMDC के सिडनी कार्यालय का उद्घाटन करेंगे और वहां के कामकाज की समीक्षा करेंगे। साथ ही, वे इस सम्मेलन में NMDC द्वारा स्थापित 'इंडिया पैवेलियन' का भी उद्घाटन करेंगे।

किशन रेड्डी 27 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया की संसाधन और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया मामलों की मंत्री मैडेलीन किंग के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा, उनके ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख खनन कंपनियों के प्रतिनिधियों, अडाणी समूह की ऑस्ट्रेलियाई इकाई 'BRAVUS' और CII के खनन प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात करने की उम्मीद है।

वे 28 अक्टूबर को 'मिनरल्स काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया' के साथ महत्वपूर्ण खनिजों और 'रेयर अर्थ' (दुर्लभ खनिजों) पर आयोजित एक गोलमेज चर्चा में शामिल होंगे। इसमें ऑस्ट्रेलिया के संसाधन मामलों के सहायक मंत्री एंथनी चिशोल्म भी मौजूद रहेंगे। इसके बाद वे मेलबर्न जाएंगे, जहां वे NBCC (नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के ऑस्ट्रेलियाई कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। साथ ही, वे NBCC और 'गोल्डफील्ड्स ऑस्ट्रेलिया' के बीच होने वाले MoU (समझौता ज्ञापनों) के आदान-प्रदान के साक्षी बनेंगे।

29 अक्टूबर को मोनाश यूनिवर्सिटी में, किशन रेड्डी नई खनन तकनीकों, पर्यावरण संरक्षण, खनिज संसाधन विकास, संयुक्त रिसर्च और कौशल विकास पर होने वाली चर्चाओं में हिस्सा लेंगे। वे वहां रिसर्च सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों तथा 'ऑस्ट्रेलेशियन इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड मेटलर्जी' के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ पेशेवर प्रशिक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ खनन प्रथाओं पर बातचीत करेंगे। यह भी पढ़ें - अधिकारियों ने माधपुर में सड़क मरम्मत और नवीनीकरण कार्यों का जायजा लिया

बयान में कहा गया है कि यह दौरा जून 2020 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए उस समझौता ज्ञापन (MoU) को आगे बढ़ाने के लिए है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों, रणनीतिक खनिज खनन, प्रसंस्करण और कोयला गैसीफिकेशन जैसे विषय शामिल हैं। इसमें मुख्य प्राथमिकता KABIL (खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड) के जरिए लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, रेयर अर्थ (दुर्लभ मृदा) और ग्रेफाइट परियोजनाओं में निवेश के मौकों की पहचान करना होगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस दौरे में भारतीय कंपनियों को ऑस्ट्रेलियाई परियोजना डेवलपर्स के साथ जोड़ने, संयुक्त उद्यमों (joint ventures) की संभावना तलाशने, और भारत या किसी तीसरे देश में लिथियम हाइड्रॉक्साइड और लिथियम कार्बोनेट के लिए रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग सुविधाएं स्थापित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। जुलाई 2026 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और जियोसाइंस ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ समझौता ज्ञापन वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को और बढ़ावा देगा।

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