हैदराबाद: पीने के पानी की आपूर्ति सुरक्षित रखें। बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें। ग्रामीण रोजगार पैदा करें और उसे सुनिश्चित करें। कृषि को बढ़ावा दें, लेकिन ऐसी फसलों पर ध्यान दें जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है।

शुक्रवार को हुई 'अल नीनो' (El Niño) के प्रभाव पर बनी कैबिनेट उप-समिति की पहली बैठक के अनुसार, ये चार सिद्धांत आने वाले महीनों के लिए तेलंगाना की सूखा प्रबंधन योजनाओं का मुख्य आधार होंगे। सरकार 'अल नीनो' के कारण पड़ने वाले गंभीर प्रभावों से निपटने की तैयारी कर रही है।

समिति ने यह भी घोषणा की कि सरकार 31 अक्टूबर (जो कि अंतिम समय-सीमा है) तक सूखा प्रभावित मंडलों की सूची जारी करेगी। साथ ही, सूखे की स्थिति पर व्यापक चर्चा के लिए जल्द ही एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई जाएगी।

उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, दानसारी 'सीथक्का' अनसूया, तुम्माला नागेश्वर राव और वाकिती श्रीहरी शामिल हुए। इनके अलावा, मुख्य सचिव संजय जाजू और विभिन्न विभागों के सचिव भी बैठक में मौजूद थे।

भट्टी ने अधिकारियों से सूखे की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने और उन मंडलों की पहचान करने को कहा जिन्हें सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं होनी चाहिए जहाँ पहले से ही भीषण सूखा है, बल्कि उन मंडलों को भी शामिल करना चाहिए जहाँ सूखे का प्रभाव 20 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा, "सूखे का पहले से आकलन करने से सरकार को लोगों तक समय पर मदद पहुँचाने में मदद मिलेगी। हर विभाग को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों की पहचान करनी चाहिए और उनसे निपटने के लिए स्पष्ट कार्य योजना तैयार करनी चाहिए।"

सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि पानी की मौजूदा कमी को देखते हुए किसानों को धान की खेती नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "कृषि और सिंचाई विभागों को किसानों को पानी की उपलब्धता और मौसम की स्थिति के आधार पर फसल चुनने के बारे में पहले से मार्गदर्शन देना चाहिए।"

कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव ने कहा कि किसानों और आम जनता को ज़मीनी हकीकत के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ज़िला स्तर पर साप्ताहिक रिपोर्ट जारी की जानी चाहिए, जिसमें भूजल स्तर, बढ़ता तापमान और अन्य संबंधित संकेतकों का डेटा हो। साथ ही, ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जिससे यह जानकारी सभी तक पहुँच सके। पंचायत राज मंत्री सीथक्का ने जिला कलेक्टरों और ITDA प्रोजेक्ट अधिकारियों को विशेष आपातकालीन फंड आवंटित करने की मांग की। उन्होंने बताया कि राज्य में सूखे से निपटने के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये के काम किए जा रहे हैं।

पशुपालन, डेयरी विकास और खेल मंत्री वकिती श्रीहरी ने कहा कि गांवों के तालाबों में जल स्तर काफी गिर गया है, जिसका असर मछली पालन पर पड़ रहा है। इसलिए, अब मुख्य जलाशयों में मछलियां छोड़ने को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पशुओं के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित करने के लिए हर गांव में उनके पीने के लिए पानी के कुंड (ट्रफ) बनाए जाएं।

मुख्य सचिव संजय जाजू ने बताया कि जिला कलेक्टरों को आपातकालीन फंड के रूप में 1-1 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, राज्य के 358 मंडल सूखे की चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि 18 जिलों में बारिश कम हुई है, जबकि 15 जिलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 324 मंडलों में भूजल स्तर चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने आगे बताया कि तेलंगाना के जलाशयों की स्थिति भी खराब है; यहां 470 TMCft पानी जमा करने की क्षमता है, लेकिन अभी केवल 170 TMCft पानी ही उपलब्ध है।

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