हैदराबाद: BRS नेता और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने रविवार को कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि वह सिद्दीपेट ज़िले को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली BRS सरकार के समय शुरू किए गए विकास कार्यों को पूरा करने के बजाय उन्हें रोक दिया गया है।

सिद्दीपेट ज़िले की 10वीं सालगिरह के मौके पर गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए हरीश राव ने कहा कि 2016 में ज़िले के गठन से प्रशासन लोगों के करीब आया है। उन्होंने कहा कि हुस्नाबाद, चेरियाल, डुब्बाक, वारगल और दूसरे मंडलों के लोगों को पहले सरकारी कामों के लिए संगारेड्डी जाना पड़ता था।

अलग सिद्दीपेट ज़िले की मांग को याद करते हुए हरीश राव ने कहा कि यह प्रस्ताव सबसे पहले 1983 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.टी. रामा राव के सामने रखा गया था। "हालांकि, यह मांग 2016 में के. चंद्रशेखर राव ने पूरी की।"

हरीश राव ने कहा कि अनंतगिरी, गौरावल्ली, रंगनायकसागर, मल्लन्नासागर और कोंडापोचम्मासागर जैसी सिंचाई परियोजनाओं से इलाके में खेती की स्थिति बेहतर हुई है। उन्होंने पीने के पानी की सप्लाई, सड़कों, ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और IT टावर की स्थापना का भी ज़िक्र किया।

रेवंत रेड्डी सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कृष्णा और गोदावरी नदियों में पानी होने के बावजूद किसानों को बिजली कटौती और सिंचाई के पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

इस स्थिति को "कृत्रिम सूखा" बताते हुए हरीश राव ने आरोप लगाया कि कालेश्वरम, कलवाकुर्थी और देवदुला सिंचाई परियोजनाओं के पंप ठीक से नहीं चलाए जा रहे हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सड़कों, वेटनरी कॉलेज, स्पोर्ट्स स्टेडियम, टूरिज्म से जुड़े कामों और एग्रीकल्चर कॉलेज समेत कई विकास परियोजनाओं को कांग्रेस सरकार ने या तो रद्द कर दिया है या रोक दिया है।

हरीश राव ने मांग की कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी किसानों से माफ़ी मांगें और फसल ऋण माफ़ी का काम पूरा करें। उन्होंने दावा किया कि सिद्दीपेट विधानसभा क्षेत्र में लगभग 24,000 किसान अभी भी इस योजना के तहत राहत का इंतज़ार कर रहे हैं।

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