Telangana: ED ने 'क्विड प्रो क्वो' मामले में जगन के ख़िलाफ़ रोज़ाना सुनवाई की मांग की
हैदराबाद: ED ने तेलंगाना हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी है कि PMLA के तहत आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री YS जगन मोहन रेड्डी और अन्य के ख़िलाफ़ दायर मुकदमों में तेज़ी से सुनवाई हो, रोज़ाना सुनवाई हो और सभी आरोपी व्यक्तिगत रूप से पेश हों।
पूर्व मंत्री YS विवेकानंद रेड्डी की हत्या के मामले में कथित हवाला कैश लेन-देन के सिलसिले में पूछताछ के लिए कडप्पा के सांसद YS अविनाश रेड्डी को ED का नोटिस मिलने के कुछ दिनों बाद, ED अधिकारियों ने एक दशक पहले दर्ज 'क्विड प्रो क्वो' (लेन-देन के बदले फ़ायदा) मामले में जगन मोहन रेड्डी और अन्य आरोपियों की रोज़ाना पेशी और तेज़ी से सुनवाई की प्रक्रिया की मांग की है।
एजेंसी के अधिकारियों ने तेलंगाना हाई कोर्ट में एक नई याचिका दायर की है, जिसमें आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को इस चर्चित 'क्विड प्रो क्वो' मामले की रोज़ाना की कार्यवाही में शामिल होने और तेज़ी से सुनवाई की प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
ED ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी में आते हैं और उनसे निपटने का तरीका भी अलग होना चाहिए। गहरी साज़िश वाले और जनता के पैसे का भारी नुकसान करने वाले आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इन्हें ऐसे गंभीर अपराध माना जाना चाहिए जो पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं और देश की वित्तीय सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। कम से कम दस साल पहले, CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर, ED अधिकारियों ने YS जगन मोहन रेड्डी और 73 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की थी। यह कार्रवाई बड़ी कंपनियों और व्यक्तियों को सरकारी फ़ायदा पहुँचाने और YS राजशेखर रेड्डी के मुख्यमंत्री रहते हुए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए फ़ायदे के बदले जगन मोहन रेड्डी और उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियों में भारी निवेश प्राप्त करने के 'क्विड प्रो क्वो' समझौतों की जाँच के लिए की गई थी। ED अधिकारियों ने पाया कि ऑरोबिंदो फार्मा लिमिटेड, हेटेरो ड्रग्स लिमिटेड, इंदु प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, इंदु टेकज़ोन प्राइवेट लिमिटेड, लेपाक्षी नॉलेज हब प्राइवेट लिमिटेड, VANPIC प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड जैसी कंपनियों और व्यक्तियों ने बहुत ज़्यादा कीमतों पर शेयर खरीदकर YS जगन मोहन रेड्डी और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों - जैसे भारती सीमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड, जगती पब्लिकेशन लिमिटेड, जननी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड - में भारी निवेश किया था। हाल की घटनाक्रम में, ED ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत तेज़ी से सुनवाई के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने आपराधिक न्याय प्रणाली से यह निर्देश देने की मांग की है कि कार्यवाही उचित तेज़ी से पूरी की जाए।
YS जगन मोहन रेड्डी मामले में कार्यवाही लगभग दस वर्षों से लंबित है और कार्यवाही का क्रम ही यह दिखाता है कि मामले की सुनवाई में उचित तेज़ी नहीं बरती गई है। न्याय के हित में, डिस्चार्ज याचिकाओं के साथ दायर अभियोजन शिकायतों की तेज़ी से और रोज़ाना सुनवाई की जानी चाहिए।
ED के अनुसार, एजेंसी ने 2016 और 2021 के बीच जगन मोहन रेड्डी और अन्य के खिलाफ CBI अदालत में कुल नौ चार्जशीट दायर की हैं। सभी नौ चार्जशीट पर संज्ञान लिया गया है और डिस्चार्ज याचिकाओं पर सुनवाई लंबित है। डिस्चार्ज याचिकाओं के लंबित रहने के कारण अभियोजन की शिकायत शुरुआती चरण में ही अटकी हुई है और नतीजतन शिकायत पर आगे की कार्यवाही में देरी हुई है।