दिल्ली के आंदोलन में शामिल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तेलंगाना के वॉलंटियर्स ने बुधवार शाम 4:30 बजे हैदराबाद के पीपल्स प्लाज़ा में एक प्रदर्शन और जीत का मार्च निकाला। उनकी मांगें थीं - शिक्षा में सुधार, कथित पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही और गिरफ़्तारी व मुकदमों के खिलाफ़ केंद्र सरकार के आश्वासन का पालन।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तिरंगा लहराया, विरोध के गीत गाए, रैप किया और गद्दार के गाने बजाए।
दिल्ली में CJP तेलंगाना के वॉलंटियर्स को कोऑर्डिनेट करने वाले क्लाइमेट और सोशल जस्टिस एक्टिविस्ट रुचित आशा कमल ने इन मांगों को प्राइवेटाइज़ेशन और भ्रष्टाचार से जोड़ा। उन्होंने कहा, "सब कुछ प्राइवेट हो गया है। सब कुछ बिक रहा है। पेपर बिक रहे हैं। स्कूल बिक रहे हैं। हम इसके खिलाफ़ हैं। हम, तेलंगाना के युवा, प्राइवेटाइज़ेशन और भ्रष्टाचार के मॉडल को नकारते हैं।" उन्होंने सांप्रदायिकता पर भगत सिंह की बातों का ज़िक्र किया और कहा कि शिक्षा और बुनियादी ज़रूरतें मुफ़्त होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दिल्ली आंदोलन में तेलंगाना से लगभग 70 वॉलंटियर्स शामिल थे।
हैदराबाद के एक्टिविस्ट और CJP तेलंगाना कोऑर्डिनेटर विजय मल्लंगी ने कहा, "हम दिल्ली में लगभग 40 दिन काम करने के बाद लौटे हैं। यह हमारे लिए अपनी जीत का विनम्रता से जश्न मनाने का पल है। अब हम तेलंगाना में शिक्षा सुधारों पर काम करना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि ग्रुप स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन से संपर्क करेगा, सदस्य बनाएगा और राज्य सरकार से बातचीत की कोशिश करेगा।
तेलंगाना की मांगों में फ़ीस रिइम्बर्समेंट में देरी, स्कूलों का खराब स्टैंडर्ड और सुविधाओं में कमी जैसे मुद्दे शामिल थे। विजय ने राज्य सरकार से शिक्षा पर खर्च दोगुना करने और बजट का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा इसके लिए तय करने की मांग की।
वॉलंटियर्स में यशवंत और प्रत्युषा भी शामिल थे, जो दिल्ली गए थे। प्रत्युषा ने आरोप लगाया कि ट्रेन में जानबूझकर देरी की गई और जब उनका ग्रुप पहुंचा तो मेट्रो और बस सर्विस बंद थीं। उन्होंने कहा, "जो लोग सीधे तौर पर विरोध में शामिल नहीं हो सके, उन्होंने खाना भेजकर हमारा साथ दिया।" उन्होंने यह भी बताया कि बाद में पुलिस ने पानी और खाने की सप्लाई रोक दी थी।
25 जुलाई को ट्विटर के ज़रिए वॉलंटियर्स को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की खबर मिली। यशवंत ने बताया कि खबर मिलने से कुछ देर पहले ही पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया था और उनके ग्रुप को लग रहा था कि टकराव जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हमने ट्विटर पर देखा और इस्तीफ़े की पुष्टि की। हमें लगा कि हमने इतिहास बनते देखा है। यह इस्तीफ़ा हमारे लिए बस एक शुरुआत है।” साथ ही, उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की मांग भी की।
विजय ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों के यह कहने पर कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं, CJP ने दिल्ली का विरोध-प्रदर्शन खत्म कर दिया। उन्होंने इस बातचीत को एक “जेंटलमैन एग्रीमेंट” (आपसी भरोसे वाला समझौता) बताया जिस पर CJP ने भरोसा किया। हालांकि, उन्होंने दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल में पुलिस की जारी कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि सरकार अपने बयान का सम्मान करे। अगर वह ऐसा नहीं करती है, तो हम फिर से विरोध-प्रदर्शन शुरू करेंगे।”