देव्नार स्कूल फॉर द ब्लाइंड के छात्रों के लिए सात ऐसी ब्रेल स्टोरीबुक्स (कहानी की किताबें) बनाई गई हैं जिन्हें छूकर महसूस किया जा सकता है। इससे स्कूल की लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए सुलभ सामग्री जुड़ी है, जहाँ ऐसे रिसोर्स कम थे। इन किताबों को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि ये दृष्टिबाधित बच्चों में शुरुआती साक्षरता, स्वतंत्र रूप से सीखने और साथ मिलकर कहानी पढ़ने के अनुभव को बढ़ावा दें।
इन किताबों को InvoiceCloud के हैदराबाद ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के कर्मचारियों ने तैयार किया है। उन्होंने कम्युनिटी आउटरीच पहल के तहत SoulAce के साथ मिलकर इन्हें हाथ से बनाने में 65 घंटे वॉलंटियर के तौर पर काम किया।
इन स्टोरीबुक्स में ब्रेल टेक्स्ट के साथ-साथ ऐसी तस्वीरें (इलस्ट्रेशन) भी हैं जिन्हें छूकर महसूस किया जा सकता है। ये तस्वीरें उभरे हुए ग्राफ़िक्स और अलग-अलग टेक्सचर से बनी हैं, जिससे बच्चे अपने क्लासमेट्स, माता-पिता और शिक्षकों के साथ मिलकर पढ़ सकते हैं। इस दोहरे फ़ॉर्मेट वाले तरीके का मकसद कहानी सुनाने के अनुभव को ज़्यादा समावेशी बनाना और क्लासरूम में बच्चों की भागीदारी को बेहतर करना है।
देव्नार स्कूल फॉर द ब्लाइंड के प्रिंसिपल रामा कृष्णा वड्डाडी ने कहा, "हमारे छात्रों को सहानुभूति की ज़रूरत नहीं है; उन्हें कहानियों, सीखने के मौकों और उन अनुभवों तक पहुँच चाहिए जो हर बच्चे को मिलते हैं। ये किताबें ठीक वही चीज़ें देती हैं।"
InvoiceCloud के सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट और इंडिया साइट लीडर बीजू डेविस ने कहा कि इस पहल का मकसद पढ़ने के लिए ऐसी सामग्री बनाना था जिससे बच्चे स्वतंत्र रूप से जुड़ सकें और साथ ही कहानी सुनने-सुनाने का अनुभव सबके लिए साझा हो सके।