भगवान राम की प्रतिमा क्रेन से हटाई, भारी पुलिस बल तैनात; भाजपा ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट के नियमों का हवाला
हैदराबाद : तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बशीरबाग चौराहे पर त्योहार के दौरान स्थापित भगवान राम की भव्य प्रतिमा को प्रशासन के निर्देश के बाद हटा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक संरचनाओं से संबंधित दिशा-निर्देशों का हवाला दिए जाने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने स्वयं प्रतिमा को वहां से दूसरी जगह स्थानांतरित किया। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, प्रतिमा हटाए जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की जानकारी सामने आई है।
बशीरबाग चौराहे पर स्थापित की गई थी प्रतिमा
जानकारी के अनुसार, हैदराबाद के बशीरबाग चौराहे पर त्योहार के अवसर पर भगवान राम की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी। प्रतिमा स्थापित होने के बाद यह स्थान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया था। इसी बीच प्रशासन की ओर से प्रतिमा को सार्वजनिक स्थान से हटाने के निर्देश दिए गए। प्रशासनिक स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया, जिसके बाद प्रतिमा को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, प्रतिमा कब स्थापित की गई थी और उसे किस स्थान पर स्थानांतरित किया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मंदिर ट्रस्ट ने खुद हटाई भगवान राम की प्रतिमा
इस पूरे घटनाक्रम की महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रतिमा हटाने की कार्रवाई मंदिर ट्रस्ट की ओर से की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रशासन के निर्देश के बाद ट्रस्ट ने स्वयं प्रतिमा को चौराहे से दूसरी जगह शिफ्ट किया। इससे प्रतिमा हटाने की प्रक्रिया प्रशासनिक निर्देशों के तहत पूरी हुई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रतिमा के स्थानांतरण के लिए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के बीच क्या बातचीत हुई थी। इस संबंध में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों का विस्तृत आधिकारिक बयान भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के नियमों का दिया गया हवाला
प्रतिमा हटाने के पीछे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक संरचनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया है। देश में सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अनधिकृत धार्मिक निर्माण के संबंध में न्यायालय ने समय-समय पर दिशा-निर्देश दिए हैं। इनका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों का उपयोग, यातायात व्यवस्था और संबंधित प्रशासनिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, बशीरबाग की इस प्रतिमा के संबंध में किस विशेष आदेश या कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की गई, इसकी आधिकारिक प्रति उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले में प्रशासन की ओर से दिए गए कारण और प्रतिमा की स्थापना की अनुमति से संबंधित तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
प्रतिमा स्थानांतरित किए जाने के बाद बशीरबाग इलाके में पुलिस बल की तैनाती की गई है। इस घटनाक्रम को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। पुलिस की मौजूदगी का उद्देश्य किसी भी संभावित विवाद या अप्रिय स्थिति को रोकना बताया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी हिंसक घटना, गिरफ्तारी या पुलिस के साथ झड़प की पुष्टि नहीं की गई है।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
भगवान राम की प्रतिमा हटाए जाने की घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होने की जानकारी सामने आई है। भगवान राम की प्रतिमा हटाए जाने के बाद तेलंगाना भाजपा ने सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस सरकार की आलोचना की। भाजपा ने आरोप लगाया कि दशहरे के अवसर पर हिंदू संगठनों द्वारा स्थापित प्रतिमा को हटाना श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं की अनदेखी है। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने इस मामले को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अयोध्या में 1949 के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के पुराने रुख पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उनके ऐतिहासिक दावे को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के बजाय राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रतिमा को बशीरबाग चौराहे से स्थानांतरित किया जा चुका है। आगे प्रतिमा कहां रखी जाएगी और उसके स्थायी स्थान को लेकर क्या निर्णय होगा, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। मामले में प्रशासनिक आदेश, मंदिर ट्रस्ट का पक्ष और संबंधित अधिकारियों का बयान आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। यह घटनाक्रम सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों और प्रशासनिक नियमों के पालन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।