Hyderabad हैदराबाद: सेपक टकरॉ (Sepak Takraw) खेल को भारत में नई पहचान दिलाने वाले जाने-माने कोच धनराज कोयलकर का सोमवार शाम निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से गंभीर गुर्दे की बीमारी (chronic kidney ailment) से जूझ रहे थे। वे दशहरे के बाद से ही हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। धनराज कोयलकर अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। खेल जगत में उनके निधन से गहरा शोक व्याप्त है। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने उन्हें एक समर्पित गुरु और प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में याद किया।
पिछले 25 वर्षों से उन्होंने हैदराबाद के एल.बी. स्टेडियम (LB Stadium) और स्पोर्ट्स स्कूल (Hakimpet) में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उनके मार्गदर्शन में ए. तरनगिनी, आर. नवाहो और एन. मधु जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। खेल जगत के वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि धनराज कोयलकर केवल एक प्रशिक्षक नहीं बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा थे।
उन्होंने सीमित संसाधनों में सेपक टकरॉ जैसे अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध खेल को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनके छात्रों ने बताया कि कोयलकर अनुशासन, फिटनेस और समर्पण को सफलता की कुंजी मानते थे। राज्य खेल परिषद और सेपक टकरॉ एसोसिएशन ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। संगठन ने उन्हें "सेपक टकरॉ के जनप्रणेता" के रूप में श्रद्धांजलि दी। खेल परिषद ने कहा कि कोयलकर की कमी को भरना मुश्किल होगा क्योंकि उन्होंने इस खेल को जमीनी स्तर पर स्थापित करने में असाधारण योगदान दिया।
धनराज कोयलकर को उनके सहयोगी एक शांत, लेकिन दृढ़ निश्चयी व्यक्ति के रूप में याद करते हैं। वे हमेशा खिलाड़ियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते थे और उनकी फिटनेस और मनोबल को ऊंचा बनाए रखने में मदद करते थे। उनके निधन के बाद शहर के खेल परिसर और प्रशिक्षण केंद्रों में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। राज्य खेल मंत्री ने भी ट्वीट कर उनके योगदान को याद किया और कहा कि सरकार उनके परिवार को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
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