सेमीकंडक्टर बने आत्मनिर्भर भारत की रीढ़: DRDO प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने दी ‘ESTIC-2025’ में बड़ी जानकारी
Hyderabad हैदराबाद। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के चेयरमैन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (DR&D) के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि सेमीकंडक्टर तकनीक आज आधुनिक वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बन चुकी है, जो स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वे यहां डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब (DRDL) में आयोजित ‘एमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC-2025)’ के कर्टन रेज़र कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन DRDO द्वारा किया गया है। डॉ. कामत ने कहा कि दुनिया जिस गति से डिजिटलाइजेशन और ऑटोमेशन की दिशा में बढ़ रही है, सेमीकंडक्टर अब राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रगति और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अनिवार्य हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत ने पिछले चार वर्षों में जिस तेजी से प्रगति की है, वह देश की वैज्ञानिक क्षमता और नीति-निर्माण की दूरदर्शिता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की शुरुआत 2021 में की गई थी और केवल चार साल में भारत ने “विजन से इम्प्लिमेंटेशन” तक का सफर तय कर लिया है। यह भारत के लिए एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है, जिसने देश को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में एक नई पहचान दी है। डॉ. कामत ने कहा कि DRDO ने स्वदेशी तकनीक के जरिए सेमीकंडक्टर निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। संगठन ने 4-इंच सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) वेफर्स के निर्माण के स्वदेशी तरीकों का विकास किया है। साथ ही, DRDO ने गैलियम नाइट्राइड (GaN) हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर (HEMTs) को 150 वाट तक की क्षमता तक सफलतापूर्वक तैयार किया है। यह उपलब्धि देश को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च प्रदर्शन उपकरणों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा कि भारत के ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य को साकार करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार और सतत विकास को प्राथमिकता देनी होगी। ESTIC-2025 सम्मेलन प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार के 13 मंत्रालयों और विभागों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन 3 से 5 नवंबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। इसका थीम है — ‘विकसित भारत 2047 – अग्रणी सतत नवाचार, तकनीकी प्रगति और सशक्तिकरण’। इस सम्मेलन में देश-विदेश के शीर्ष वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योगपति और नीति-निर्माता भाग लेंगे। इसका उद्देश्य भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।