हैदराबाद। तेलंगाना जेल विभाग ने कैदियों के शैक्षणिक भविष्य को बेहतर बनाने और उनके पुनर्वास के उद्देश्य से नई पहल शुरू की है। तेलंगाना ओपन स्कूल सोसाइटी (TOSS) के सहयोग से जेलों में ओपन स्कूलिंग कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत अब कैदी जेल में रहते हुए दसवीं (SSC) और इंटरमीडिएट यानी 12वीं की पढ़ाई कर सकेंगे।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन शनिवार, 7 नवंबर को शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव डॉ. योगिता राणा ने किया। इस दौरान जेल एवं सुधार सेवाओं की महानिदेशक डॉ. सौम्या मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के तहत कैदियों को पढ़ाई के लिए अध्ययन सामग्री, शैक्षणिक सहायता और नियमित कक्षाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जेलों में विशेष TOSS केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि कैदियों को प्रवेश प्रक्रिया और पढ़ाई से संबंधित सुविधाएं मिल सकें। कक्षाएं प्रत्येक रविवार और महीने के दूसरे शनिवार को आयोजित की जाएंगी। जरूरत के अनुसार अन्य दिनों में भी कक्षाएं लगाई जा सकती हैं।

इस पहल के प्रति कैदियों ने शुरुआत से ही रुचि दिखाई है। चालू शैक्षणिक सत्र में 70 कैदियों ने दसवीं और 15 कैदियों ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए इच्छा जताई है। इस तरह शुरुआती तौर पर कुल 85 कैदी शिक्षा कार्यक्रम से जुड़ने के इच्छुक हैं।

कार्यक्रम की एक खास बात यह है कि इसमें प्रवेश के लिए उम्र की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है। यानी अलग-अलग उम्र के कैदी अपनी अधूरी पढ़ाई दोबारा शुरू कर सकेंगे। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद निर्धारित प्रवेश शर्तें पूरी करने वाले कैदियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।

शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव डॉ. योगिता राणा ने कैदियों के लिए पाठ्यक्रम शुल्क में 1,250 रुपये की रियायत देने की घोषणा की। उन्होंने जेलों में पुस्तकालय स्थापित करने में भी सहयोग का आश्वासन दिया, ताकि कैदियों में पढ़ने और स्वयं अध्ययन करने की आदत विकसित हो सके।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करती है। उन्होंने कैदियों से इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी पढ़ाई जारी रखने की अपील की।

जेल एवं सुधार सेवाओं की महानिदेशक डॉ. सौम्या मिश्रा ने कहा कि जेल विभाग का उद्देश्य केवल कैदियों को हिरासत में रखना नहीं, बल्कि उन्हें सुधार, शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से समाज में दोबारा स्थापित करना भी है। शिक्षा कैदियों को अपने जीवन को नए सिरे से बनाने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में लौटने में मदद कर सकती है।

इस पहल के तहत आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे कैदियों के बच्चों की शिक्षा में सहायता देने का भी आश्वासन दिया गया है।

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