हैदराबाद। तेलंगाना में सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) में कथित भ्रष्टाचार और विदेशी कोयले के प्रस्तावित आयात को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सिंगरेनी में कथित घोटाले, विदेशी कोयले के आयात और बिजली खरीद से जुड़ी अनियमितताओं की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की। KTR ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे इन मामलों की जांच किसी मौजूदा हाईकोर्ट जज से कराएं, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।हैदराबाद के तेलंगाना भवन में आयोजित पार्टी बैठक के दौरान KTR ने कहा कि वह लंबे समय से सिंगरेनी कोलियरीज में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप उठाते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कंपनी से जुड़े कई फैसलों पर सवाल खड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री को हाईकोर्ट जज से जांच कराने की चुनौती
KTR ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस बयान पर नाराजगी जताई, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि यदि KTR लिखित शिकायत देंगे तो सरकार जांच कराने पर विचार करेगी।BRS नेता ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों का समाधान केवल पत्राचार या मीडिया में बयानबाजी से नहीं किया जा सकता।उन्होंने मांग की कि सिंगरेनी में कथित भ्रष्टाचार और विदेशी कोयले के प्रस्तावित आयात की जांच किसी वर्तमान हाईकोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।KTR के अनुसार, स्वतंत्र न्यायिक जांच से ही संबंधित फैसलों और वित्तीय लेनदेन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
10 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप
KTR ने सिंगरेनी में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री के एक रिश्तेदार की कथित भूमिका पर सवाल खड़े किए।इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि सिंगरेनी में सौर ऊर्जा से संबंधित एक अन्य कथित घोटाले की जानकारी भी वह जल्द सार्वजनिक करेंगे।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें किसी न्यायिक जांच में साबित हुए तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
विदेशी कोयले के आयात पर उठाए सवाल
BRS नेता ने तेलंगाना में विदेशी कोयले के प्रस्तावित आयात की आवश्यकता पर भी सवाल उठाए।KTR ने दावा किया कि सिंगरेनी से मिलने वाले कोयले की कीमत लगभग 3,800 रुपये प्रति टन है, जबकि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आयातित कोयले की कीमत 10,000 से 12,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच सकती है।उन्होंने आरोप लगाया कि घरेलू स्तर पर कोयला उपलब्ध होने के बावजूद महंगे आयात पर विचार करने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।KTR ने मांग की कि सरकार विदेशी कोयले के प्रस्तावित आयात की लागत और उससे जुड़े सभी फैसलों को सार्वजनिक करे।
बिजली खरीद की कीमतों पर भी सरकार को घेरा
केटी रामा राव ने बिजली खरीद के मुद्दे पर भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने दावा किया कि पिछली BRS सरकार के समय छत्तीसगढ़ से 3.90 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीद का समझौता हुआ था, जिसे कांग्रेस ने घोटाला बताया था।KTR ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार अब लगभग 15 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदने पर विचार कर रही है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पिछली सरकार की कम दर वाली बिजली खरीद पर सवाल उठाए गए थे, तो वर्तमान सरकार की प्रस्तावित खरीद की भी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए।
सिंगरेनी पर 60 हजार करोड़ की बकाया राशि का दावा
KTR ने दावा किया कि सिंगरेनी कोलियरीज की लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान लंबित है।उनका आरोप है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति खराब होने के पीछे सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन में गिरावट और बकाया भुगतान जैसी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की जरूरत है।BRS नेता ने आरोप लगाया कि कोयले की कमी को आधार बनाकर महंगे आयात और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने की तैयारी की जा रही है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी दिया जवाब
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विदेशी कोयले के आयात से जुड़े आरोपों को लेकर कहा है कि उनकी सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार है।मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए दावा किया कि पिछली BRS सरकार ने ही यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी कोयला आयात करने की योजना बनाई थी।उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार परियोजना में घरेलू कोयले का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है। रेवंत रेड्डी ने पिछली सरकार के दौरान परियोजना की लागत बढ़ने और बिजली उत्पादन से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए।
न्यायिक जांच की मांग से बढ़ा राजनीतिक विवाद
सिंगरेनी कोलियरीज से जुड़े आरोपों के बाद तेलंगाना में कांग्रेस और BRS के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।KTR स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने जांच के लिए तैयार होने की बात कही है।फिलहाल कथित घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हुए हैं। किसी स्वतंत्र न्यायिक जांच की औपचारिक घोषणा होने की पुष्टि भी सामने नहीं आई है।