हैदराबाद। तेलंगाना में जमीन और फार्महाउस को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस MLC और विधान परिषद में सरकारी व्हिप डॉ. बालमूर वेंकट ने मंगलवार को BRS नेतृत्व पर जमीन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच की जाएगी और जांच में अवैध कब्जा साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। कांग्रेस नेताओं ने हाल के दिनों में रंगा रेड्डी जिले में BRS नेताओं से जुड़े बताए जा रहे कई फार्महाउस और आसपास की जमीनों का दौरा किया है।
BRS नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप
बालमूर वेंकट ने आरोप लगाया कि BRS के वरिष्ठ नेताओं ने अपने दस साल के शासनकाल के दौरान सत्ता का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर संपत्ति अर्जित की। उन्होंने कुछ नेताओं से जुड़े फार्महाउस और जमीनों की जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकारी या गरीबों के लिए आवंटित जमीन पर कब्जा मिलने की स्थिति में उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।ये कांग्रेस नेताओं के आरोप हैं और संबंधित जमीनों के स्वामित्व तथा कथित उल्लंघनों का अंतिम निर्धारण सरकारी जांच, भूमि रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को रंगा रेड्डी जिले के मद्दूर में पूर्व मंत्री और BRS विधायक जी. जगदीश रेड्डी से जुड़े बताए गए फार्महाउस क्षेत्र का निरीक्षण किया था। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि करीब 50 एकड़ क्षेत्र में फैली संपत्ति के कुछ हिस्से की भूमि श्रेणी और उपयोग को लेकर सवाल हैं।
जगदीश रेड्डी की संपत्ति पर सवाल
बालमूर वेंकट और कांग्रेस MLC अडांकी दयाकर ने जगदीश रेड्डी की संपत्तियों को लेकर भी आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने दावा किया कि पिछले एक दशक में उनकी जमीन और संपत्ति में बड़ी वृद्धि हुई और इसकी जांच होनी चाहिए। वेंकट ने कहा कि जांच के बाद अगर कोई अनियमितता सामने आती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों को इस स्तर पर सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता और संबंधित पक्षों का जवाब तथा आधिकारिक जांच इसके निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण होगी।
कई फार्महाउस कांग्रेस के निशाने पर
जमीन का विवाद केवल एक BRS नेता तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस नेताओं ने जनवाड़ा में उस फार्महाउस का भी दौरा किया, जो पहले BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव के इस्तेमाल से जुड़ा रहा है।कांग्रेस नेताओं ने वहां निर्माण अनुमति और जमीन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। दूसरी ओर संपत्ति के मालिक ने दावा किया है कि फार्महाउस उनका है और इसे KTR को लीज पर दिया गया था।कांग्रेस नेताओं ने पूर्व मंत्री टी. हरीश राव से जुड़े बताए गए फार्महाउस के आसपास की जमीन का भी निरीक्षण किया और आवंटित जमीनों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की।
KCR के फार्महाउस के पास भी सर्वे
पूर्व मुख्यमंत्री और BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव के एर्रावेली स्थित फार्महाउस के आसपास की जमीन भी राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। राजस्व और सर्वे विभाग के अधिकारियों ने हाल में एर्रावेली, वरदराजपुर और वेंकटपुर गांवों में जमीन का सर्वे किया। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे नंबर 325 में 388 एकड़ की सीमाओं का डिजिटल तरीके से निर्धारण किया गया।मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पहले KCR के फार्महाउस के आसपास की जमीन को लेकर जांच का निर्देश दिया था और सरकारी जमीन मिलने पर उसे वापस लेने की बात कही थी। ये आरोप भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं और जांच की प्रक्रिया जारी है।
BRS ने भी कांग्रेस को दी चुनौती
जमीन के आरोपों पर BRS भी कांग्रेस सरकार को घेर रही है। BRS नेता टी. हरीश राव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के परिवार की जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों को उठाते हुए दोनों पक्षों की संपत्तियों की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। इस तरह जमीन विवाद में कांग्रेस और BRS दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने भी धारा 22-A के तहत प्रतिबंधित जमीनों की सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर आम संपत्ति मालिकों को परेशान करने का आरोप लगाया है।
BJP पर भी वेंकट ने साधा निशाना
बालमूर वेंकट ने जमीन विवाद के साथ BJP पर भी राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण भारत में पानी की कमी और सूखे जैसी परिस्थितियों का BJP राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।वेंकट ने मौजूदा जल संकट को अल-नीनो से जोड़ते हुए कहा कि बारिश में कमी एक व्यापक जलवायु संबंधी चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP इसे चुनावी मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है।दक्षिण भारत में इस वर्ष बारिश की कमी के स्वतंत्र आंकड़े भी सामने आए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक 18 सितंबर तक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में जून से औसत से करीब 28 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी और क्षेत्र के 143 जिलों में से 104 में सामान्य से कम बारिश थी।
अल-नीनो और जल संकट बना चिंता का विषय
तेलंगाना में भी अल-नीनो के प्रभाव और संभावित जल संकट को लेकर चिंता जताई गई है। अधिकारियों ने कम बारिश के कारण जल उपलब्धता और कृषि उत्पादन पर संभावित असर को लेकर चेतावनी दी है।ऐसे में पानी की उपलब्धता अब राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ प्रशासनिक चुनौती भी बनती जा रही है। आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति, जलाशयों की स्थिति और कृषि के लिए पानी की उपलब्धता राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।
तेलंगाना में जमीन को लेकर बढ़ी सियासत
फिलहाल तेलंगाना की राजनीति में जमीन और फार्महाउस का मुद्दा कांग्रेस और BRS के बीच बड़े टकराव का विषय बना हुआ है। कांग्रेस जहां पिछली BRS सरकार के दौरान कथित भूमि अनियमितताओं की जांच की मांग कर रही है, वहीं BRS मौजूदा कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े जमीन मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है।बालमूर वेंकट ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार कथित कब्जों की जांच आगे बढ़ाएगी और किसी भी अनियमितता की पुष्टि होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब इस विवाद में सरकारी सर्वे, राजस्व रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इन्हीं से अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
Tags: