विकाराबाद : तेलंगाना के विकाराबाद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नवाबपेट मंडल क्षेत्र में खेतों के बीच करीब एक साल की एक बच्ची लावारिस हालत में मिली। बच्ची की तबीयत भी ठीक नहीं थी। स्थानीय लोगों की नजर बच्ची पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।
पुलिस के अनुसार बच्ची खेतों में अकेली पड़ी हुई थी। आसपास कोई अभिभावक या परिवार का सदस्य मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों ने बच्ची को देखकर स्थिति की गंभीरता समझी और बिना देरी किए पुलिस को फोन किया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को वहां से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले गई।
बच्ची की हालत देखने के बाद पुलिस ने तत्काल बाल कल्याण विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद बच्ची को विभाग की देखरेख में सौंप दिया गया। अधिकारियों ने बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज कराया जा रहा है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि करीब एक साल की यह बच्ची खेती की जमीन पर लावारिस हालत में मिली थी। स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उस समय बच्ची अस्वस्थ दिखाई दे रही थी, इसलिए सबसे पहले उसकी सुरक्षा और इलाज को प्राथमिकता दी गई।
अधिकारी ने कहा कि बच्ची को बाल कल्याण विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया है और उन्होंने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। फिलहाल बच्ची की पहचान और उसके परिवार के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्ची खेतों तक कैसे पहुंची और उसे वहां कौन छोड़कर गया। इसके साथ ही आसपास के गांवों और इलाकों में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं किसी परिवार ने बच्ची के लापता होने की शिकायत तो दर्ज नहीं कराई है।
बच्ची के माता-पिता या अन्य परिजनों की पहचान फिलहाल नहीं हो सकी है। पुलिस स्थानीय लोगों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि किसी ने बच्ची को खेतों में आते या किसी व्यक्ति को वहां से जाते देखा था या नहीं।
घटना के बाद इलाके में भी इस मामले को लेकर चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खेतों में इतनी छोटी बच्ची का अकेले मिलना बेहद गंभीर मामला है। समय रहते बच्ची पर लोगों की नजर पड़ गई और पुलिस को सूचना दे दी गई, जिससे उसे सुरक्षित बचाया जा सका।
पुलिस ने बच्ची को बचाने में स्थानीय लोगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना है। अगर समय पर सूचना नहीं मिलती तो बीमार हालत में खेतों में पड़ी बच्ची की स्थिति और बिगड़ सकती थी। लोगों की सतर्कता के कारण पुलिस और बाल कल्याण विभाग समय पर कार्रवाई कर सके।
अस्पताल में बच्ची की देखरेख की जा रही है। उसकी तबीयत को देखते हुए डॉक्टरों की निगरानी में उपचार जारी है। बाल कल्याण विभाग भी मामले पर नजर बनाए हुए है और बच्ची की सुरक्षा से जुड़े जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
पुलिस का मुख्य ध्यान अब बच्ची के माता-पिता की तलाश पर है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के साथ आसपास के पुलिस थानों से भी संपर्क किया जा सकता है। बच्ची की उम्र काफी कम होने के कारण उससे उसके परिवार के बारे में जानकारी मिलना संभव नहीं है, इसलिए पुलिस को दूसरे माध्यमों से पहचान स्थापित करनी होगी।
जांच के दौरान यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्ची को जानबूझकर खेतों में छोड़ा गया था या वह किसी अन्य परिस्थिति में वहां पहुंची। इस सवाल का जवाब उसके माता-पिता या परिवार की पहचान होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल पुलिस ने बच्ची को बाल कल्याण विभाग के संरक्षण में सौंप दिया है। विभाग की ओर से उसके इलाज और देखभाल की व्यवस्था की गई है। बच्ची की स्थिति में सुधार होने तक उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा।
घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। करीब एक साल की बच्ची का खेतों में अकेली और बीमार हालत में मिलना चिंता का विषय है। हालांकि स्थानीय लोगों की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण बच्ची को समय रहते बचा लिया गया।
पुलिस ने कहा है कि बच्ची के माता-पिता या परिजनों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। जैसे ही परिवार से जुड़ी कोई जानकारी सामने आएगी, आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्ची सुरक्षित है और उसका इलाज किया जा रहा है।