NIA ने पोटू रंगा राव को UAPA के तहत तलब किया, खम्मम में विवाद

Update: 2026-04-09 15:06 GMT
Khammam: NIA द्वारा CPI (ML) मास लाइन के राज्य सचिव पोटू रंगा राव को पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद तेलंगाना के खम्मम जिले में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। एजेंसी ने उन्हें UAPA के तहत एक मामले में नोटिस जारी किया है, जिसे लेकर विपक्षी दलों और पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना की है।
जानकारी के अनुसार, NIA ने रंगा राव को वर्ष 2025 से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के तहत की जा रही है और जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इस कदम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
CPI (ML) मास लाइन और उससे जुड़े संगठनों ने इस नोटिस को “उत्पीड़न” करार दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक गतिविधियों को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रंगा राव लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं और उन्हें इस तरह नोटिस भेजना गलत है।
खम्मम में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। उन्होंने एजेंसी की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की और नोटिस वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ता है और राजनीतिक असहमति को दबाने की कोशिश होती है।
दूसरी ओर, अधिकारियों का कहना है कि NIA एक पेशेवर जांच एजेंसी है और वह केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करती है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि पूछताछ का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों को समझना है और इसमें किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।
इस मामले ने केंद्र और राज्य की राजनीति में भी चर्चा को बढ़ा दिया है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने एजेंसी की कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि अन्य ने इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि UAPA जैसे कानूनों के तहत जांच एजेंसियों को व्यापक अधिकार मिलते हैं, लेकिन इनका उपयोग करते समय संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी होता है। इससे कानून के दुरुपयोग की आशंकाओं को कम किया जा सकता है।
रंगा राव की ओर से अभी तक इस नोटिस पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, पार्टी ने संकेत दिया है कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकते हैं और मामले को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
इस घटनाक्रम के बाद खम्मम में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
कुल मिलाकर, NIA द्वारा जारी नोटिस ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की भूमिका और उनके इस्तेमाल को लेकर बहस को तेज कर दिया है। यह मामला अब केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है, जिस पर आगे की कार्रवाई और प्रतिक्रियाएं स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।
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