हैदराबाद: तेलंगाना हाई कोर्ट ने मंगलवार को IAS अधिकारी काटा अम्रपाली की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के उस आदेश पर लगी अंतरिम रोक को हटाने की मांग की थी, जिसके तहत उन्हें तेलंगाना कैडर आवंटित किया गया था। जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस रेणुका यारा की बेंच ने संकेत दिया कि वे दो हफ़्ते के भीतर आदेश जारी करेंगे।
केंद्र सरकार ने CAT के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत अम्रपाली को तेलंगाना आवंटित किया गया था। हाई कोर्ट ने मामले के अंतिम निपटारे तक 8 दिसंबर, 2025 को इसके कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी। रोक हटाने की मांग करते हुए, अम्रपाली के वकील ने तर्क दिया कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद कैडर आवंटन में उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया था।
उन्होंने तर्क दिया कि राजमुंदरी के जे. रामानंद और सिकंदराबाद की रानी कुमुदिनी, इन दो अधिकारियों को 10 अक्टूबर, 2014 की अधिसूचना में 'बाहरी' (outsiders) के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिससे तेलंगाना के सामान्य-श्रेणी के 'आंतरिक' (insider) पदों की संख्या 16 से घटकर 15 हो गई। कथित तौर पर इससे रोस्टर आवंटन प्रभावित हुआ और तेलंगाना की कीमत पर आंध्र प्रदेश को एक अतिरिक्त 'आंतरिक' पद आवंटित किया गया। वकील ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 80 का हवाला दिया, जो विभाजन के बाद कैडर आवंटन को नियंत्रित करती है।
याचिका का विरोध करते हुए, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बी. नरसिम्हा शर्मा ने तर्क दिया कि 2014 की आवंटन प्रक्रिया को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी गई थी और यह वर्तमान कार्यवाही से संबंधित नहीं थी। कोर्ट ने मामले को दशहरा की छुट्टियों के बाद तक के लिए स्थगित कर दिया।