हैदराबाद: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को भारत के औद्योगिक क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी बताया है। उन्होंने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने में इनकी अहम भूमिका होगी।
'लघु उद्योग भारती – दक्षिण भारत सम्मेलन' को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि MSME ने निर्यात बढ़ाने, अच्छी गुणवत्ता वाले रोजगार पैदा करने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान देने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि MSME भारत की GDP में 32 प्रतिशत, मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में 36 प्रतिशत और निर्यात में 49 प्रतिशत का योगदान देते हैं। उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार, उद्यम प्लेटफॉर्म पर लगभग 9.8 करोड़ MSME रजिस्टर्ड हैं, जो लगभग 40 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं; इनमें से 37 प्रतिशत उद्यमों का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
किशन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने MSME के महत्व को समझा है और इंसेंटिव, बेहतर टेक्नोलॉजी और वित्तीय सहायता के जरिए उनके विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 'ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम' (TReDS) और डिजिटल मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म जैसी पहलों के जरिए भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है।
दक्षिण भारत की औद्योगिक ताकत पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, इंजीनियरिंग, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि ये उद्योग देश की औद्योगिक वैल्यू चेन को मजबूत कर रहे हैं।