हैदराबाद: नेशनल डैम सेफ्टी अथॉरिटी (NDSA) ने तेलंगाना हाई कोर्ट को बताया है कि उसने मेदिगड्डा बैराज में आई खराबी के कारणों की जांच पूरी कर ली है और अपनी टेक्निकल रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ढांचे को फिर से चालू करने से पहले उसकी मरम्मत (रिहैबिलिटेशन) की जाए।
यह जानकारी कालेश्वरम लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (KLIS) के इस्तेमाल से जुड़ी एक लंबित रिट याचिका में हलफनामे के ज़रिए दी गई। एस. शरथ की ओर से दायर इस याचिका में मेदिगड्डा, अन्नाराम और सुंडिला बैराज, कन्नपल्ली और सुंडिला पंप हाउस और उनसे जुड़े दूसरे हिस्सों की व्यापक टेक्निकल जांच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने इनके स्ट्रक्चरल और ऑपरेशनल सुरक्षा के आकलन और यह तय करने की भी मांग की है कि क्या प्रोजेक्ट के किसी हिस्से को सीमित या नियंत्रित आधार पर सुरक्षित रूप से चलाया जा सकता है।
NDSA के हलफनामे के अनुसार, मेदिगड्डा और उससे जुड़े ढांचों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर तेलंगाना सरकार के अनुरोध के बाद, जल संसाधन विभाग ने कालेश्वरम बैराज की मरम्मत के लिए एक टेक्निकल ओवरसाइट कमेटी बनाई। इसकी अध्यक्षता NDSA के एक सदस्य (टेक्निकल) करते हैं और इसमें सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC), सेंट्रल वॉटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन (CWPRS) और सेंट्रल सॉइल एंड मैटेरियल्स रिसर्च स्टेशन (CSMRS) के एक्सपर्ट शामिल हैं।